पितृपक्ष में भागवत अमृत तुल्य: स्वामी अशोकानंद

जबलपुर। भक्ति धाम गौरी घाट में सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ का शुभारंभ हुआ। पितृपक्ष के अवसर पर आयोजित इस कथा के प्रथम दिवस पर स्वामी अशोकानंद जी महाराज ने कहा कि साक्षात भगवान को न देखा जा सके तो माता-पिता के रूप में भगवान का अनुभव अवश्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में पितृपक्ष अत्यंत महत्वपूर्ण है और इस काल में पूर्वजों को जल अर्पित करना, तर्पण करना तथा भक्ति में रम जाना पुण्यकारी होता है।

सनातन संस्कृति का महत्व

स्वामी अशोकानंद जी ने कहा कि सनातन संस्कृति को जानना और समझना आज की पीढ़ी के लिए नितांत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मन के मंदिर में प्रभु की स्थापना करनी चाहिए ताकि कोई भी कुप्रभाव या कुसंस्कार व्यक्ति को प्रभावित न कर सके। इस कलिकाल में यदि कोई साधारण से साधारण कार्य भी असंभव प्रतीत होता है तो सूर्य को अर्घ्य, भगवान के नाम का स्मरण, कुलदेवता की आराधना, माता-पिता और गुरु की सेवा मात्र से वह संभव हो जाता है।

श्रीमद् भागवत कथा का महत्व

कथा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा 88 हजार ऋषियों द्वारा पूछे गए उन प्रश्नों का उत्तर है, जिनका उद्देश्य मानव जीवन के दुःख-दर्द और परेशानियों को दूर करना था। यह कथा अमृत से भी बड़ी कही गई है, क्योंकि यह हजारों वर्षों से करोड़ों लोगों को भवसागर से पार लगाती आ रही है। कथा श्रवण करना केवल इस जन्म के पुण्य से संभव नहीं होता, बल्कि यह पूर्व जन्मों के संचित पुण्यों का प्रताप है।

हरिनाम संकीर्तन और प्रभु में रमना

स्वामी अशोकानंद जी ने कहा कि परमात्मा की कृपा इतनी व्यापक है कि प्रकृति के प्रत्येक अंश में भगवान का दर्शन संभव है। फूल-पत्तों, पर्वतों, नदियों और आकाश में भी भगवान का स्वरूप दिखाई देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि हरिनाम संकीर्तन करते हुए भगवान में रम जाना ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य है।

कलिकाल में दिव्य और चमत्कारी कथा

उन्होंने यह भी कहा कि श्रीमद् भागवत कथा इस कलिकाल में दिव्य और चमत्कारी है तथा यह जीवन के सभी कष्टों को दूर करने में सक्षम है। यदि कोई व्यक्ति मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से कथा को आत्मसात कर ले तो उसकी सभी व्यथाएं दूर हो सकती हैं और जीवन आनंदमय बन सकता है।

पितृपक्ष में 15 वर्षों से निरंतर आयोजन

भक्ति धाम गौरी घाट में पितृपक्ष के अवसर पर भागवत सेवा समिति द्वारा पिछले 15 वर्षों से निरंतर श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। इस बार भी 7 सितंबर से 14 सितंबर तक प्रतिदिन सायं 4 बजे अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक स्वामी अशोकानंद जी महाराज कथा का रसपान करा रहे हैं। समिति ने सभी श्रद्धालुओं से समय पर उपस्थित होने का आग्रह किया है।

पूजन-अर्चन और भक्तों की उपस्थिति

आज के प्रथम दिवस पर पूजन-अर्चन की शास्त्रोक्त विधि आचार्य श्री रामफल शास्त्री, पं. आशीष लालू महाराज, पं. चंद्रिका प्रसाद और पुष्पराज तिवारी ने संपन्न कराई। इस अवसर पर जेठानंद खत्री, ईश्वर नाथानी, विजय पंजवानी, हरि रोहाणी, करिश्मा शर्मा, जमनादास खत्री, प्रहलाद लालवानी, प्रिंस पंजवानी, वेदांत शर्मा, जय वाशानी, दिलीप तलरेजा, उमेश पारवानी और विध्येश भापकर सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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