पितृ पक्ष: पितरों का श्राद्ध करो, वो तुम्हें शक्ति देंगे: महामंडलेश्‍वर स्‍वामी भागवतानंद गिरी महाराज

संकल्प

मैं अपना नाम…. पिता का नाम…. माँ का नाम…. गोत्र…. भारत देश में राज्य में अपने घर आज श्राद्ध पक्ष के पुण्य पर्व पर अपने समस्त पितृओ को जल, धूप, दीप, नैवेद्य दे रहा हूं। जिन्हें आंखों से देखा नहीं जिनके बारे में जानते नहीं वह भी पितृ आएं और मेरे हाथ से धूप, दीप, नैवेद्य ग्रहण करें। जिन्हें आंखों से देखा नहीं, जिनके बारे में सुना नहीं, जिनके बारे में जानते नहीं वो भी पितर आएं और मेरे हाथ से धूप, दीप, नैवेद्य ग्रहण करें।

श्राद्ध पक्ष में किए जाने वाले महत्वपूर्ण प्रयोग

नीचे दिए निर्देशों का पालन श्राद्ध पक्ष के दौरान किया जाए – सरल, व्यवस्थित और पारंपरिक प्रक्रिया के अनुसार।

1. प्रतिदिन पंचबली का प्रयोग (पूर्णिमा से लेकर अमावस्या तक)

पंचवली में मुख्य रूप से पांच बलि यानी दान से हैं- गाय, कुत्ता, कौवा, चींटी एवं ब्राह्मण।

इनमें प्रतिदिन दोपहर 12:00 से पहले अपने घर में जो भी भोजन तैयार होता है उसे एक थाली में लेकर पांच जगह पर चार-चार रोटियों के ऊपर सब्जी, गुड़ आदि रखें।

2. मकान की दहलीज धोएं और स्वस्तिक बनाएं

मकान की दहलीज धोएं और कुमकुम से दाहिनी तरफ सीधे हाथ की ओर स्वस्तिक बनाएं।

स्वस्तिक पर बड़े दिए में कंडे रखकर घी से प्रज्वलित करें।

3. पूजा की थाली तैयार करें

एक कटोरी में घी और गुड़ मिलाएँ एवं पूजन की संपूर्ण थाली लगाएं जिसमें हल्दी, कुमकुम, चावल, फूल (हो सके तो सफेद फूल) रखें।

4. पांचों बलियों में रोटी का उपयोग

सभी पांच बली खुटों में से थोड़ी-थोड़ी रोटी तोड़ कर घी व गुड़ में मिलाएँ और समर्पित करें।

5. धूप प्रक्रिया (क्रमवार)

धूप प्रक्रिया को क्रमवार रखें — प्रत्येक धूप का सटीक उद्देश्य नीचे दिया गया है:

  1. पहली धूप — पहली पीढ़ी: पिता के वंश के माता के वंश में जो भी पितर हैं वे आएँ और मेरे हाथ से धूप, दीप, नैवेद्य ग्रहण करें।
  2. दूसरी धूप — दूसरी पीढ़ी: पिता के वंश के माता के वंश में जो भी पितर हैं वे आएँ और मेरे हाथ से धूप, दीप, नैवेद्य ग्रहण करें।
  3. तीसरी धूप — तीसरी पीढ़ी: पिता के वंश के माता के वंश में जो भी पितर हैं वे आएँ और मेरे हाथ से धूप, दीप, नैवेद्य ग्रहण करें।
  4. चौथी धूप — चौथी पीढ़ी: पिता के वंश के माता के वंश में जो भी पितर हैं वे आएँ और मेरे हाथ से धूप, दीप, नैवेद्य ग्रहण करें।
  5. पाँचवीं धूप — पाँचवीं पीढ़ी: पिता के वंश के माता के वंश में जो भी पितर हैं वे आएँ और मेरे हाथ से धूप, दीप, नैवेद्य ग्रहण करें।
  6. छठी धूप — छठी पीढ़ी: पिता के वंश के माता के वंश में जो भी पितर हैं वे आएँ और मेरे हाथ से धूप, दीप, नैवेद्य ग्रहण करें।
  7. सातवीं धूप — सातवीं पीढ़ी: पिता के वंश के माता के वंश में जो भी पितर हैं वे आएँ और मेरे हाथ से धूप, दीप, नैवेद्य ग्रहण करें।
  8. आठवीं धूप — समस्त ज्ञात-अज्ञात पितरों के लिए: जिन आंखों से देखा नहीं, जिनके बारे में सुना नहीं, जिनके बारे में जानते नहीं — वे भी पितर आएँ और मेरे हाथ से धूप, दीप, नैवेद्य ग्रहण करें।
  9. नवीं धूप — समस्त गुरु परंपरा के लिए: जो भी समस्त गुरु परंपरा में गुरु हैं, वे आएँ और मेरे हाथ से धूप, दीप, नैवेद्य ग्रहण करें।
  10. दसवीं धूप — गायों एवं कुत्तों के लिए: हमारे कुलपरंपरा में जो भी गौ माता एवं भैरव हैं वे आएँ और मेरे हाथ से धूप, दीप, नैवेद्य ग्रहण करें।

धार्मिक क्रिया — जल और प्रार्थना

हाथ में जल लेकर दिये के ऊपर से तीन बार घुमाएं और अंगूठे की धार से जमीन पर जल छोड़ें। जल छोड़कर घुटने टेक कर पाव पड़कर उठें।

निवेदन एवं समापन

आप सभी से निवेदन है कि आप अपने पित्रो को श्राद्ध तर्पण जरूर करें।

|| सर्व पितृदेवो प्रणाम आपको ||

– महामंडलेश्‍वर स्‍वामी भागवतानंद गिरी महाराज, उज्जैन

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