Video: पन्ना में शरद पूर्णिमा महोत्सव की दिव्यता- रास के रमैया के जयकारों से गूंजा धाम

पन्ना। अन्तर्राष्ट्रीय शरदपूर्णिमा महोत्सव अपने परम्परागत भव्यता के साथ सम्पन्न हो गया। श्री 108 प्राणनाथ जी मंदिर के पूर्व सचिव राकेश कुमार शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि शनिवार प्रात: 9 बजे झीलना कार्यक्रम सम्पन्न होने के बाद जैसे ही अक्षरातीत परब्रह्म विजयाभिनंद बुद्ध निष्कलंक श्री प्राणनाथ जी की सेवा रासमण्डल से बंगला साहिब की तरफ रवाना हुई तो सुन्दरसाथ के कण्ठों से धाम के धनी (रास के रमैया) के जयकार से पन्ना का आसमान गुंजित हो उठा।

10 दिवसीय महोत्सव का पारंपरिक समापन

विजयादशमी से पंचमी तक चले इस दस दिवसीय महोत्सव में शरद पूर्णिमा पूनम की महारात्रि में श्रीजी की सवारी रास मण्डल में विराजमान हुई थी। शनिवार पंचमी के दिन के भोर होते ही रासमण्डल से विजयानंद बुद्ध निष्कलंक अवतार श्री प्राणनाथ जी की सेवा बंगला साहिब में पधराने के साथ ही अन्तर्राष्ट्रीय शरदपूर्णिमा का आयोजन भव्यता के साथ सम्पन्न हो गया।

शरद पूर्णिमा से पंचमी तक एक महारात्रि

प्रणामी धर्मावलम्बियों के अनुसार रासमण्डल जो शरद पूर्णिमा से पंचमी तक चलती है वास्तव में एक महारात्रि है। जिसमें महामति अनन्त स्वरूप धारण कर अपने सुन्दरसाथ के संग बृज की लीलाएं पुन: कलियुग में सम्पन्न करते हैं। इस महारात्रि में सुन्दरसाथ श्रीजी को अपने पिया के स्वरूप में देखते हैं तथा सुख के अनंत दिव्य सागर में गोते लगाते हैं।

दही से भरी मटकी लेकर नाचे सुंदरसाथ

परम्परानुसार शोभायात्रा के साथ सजी हुई मटकी में दही भरकर नाचते सुंदरसाथ श्रद्धालु नजर आये। इसमें एक तरफ जहां पुरूष श्रद्धालु मटकी लेकर अपने आप में मग्न थे, वहीं महिला श्रद्धालु की टोली भी मटकी ले-लेकर श्रीजी को रिझाने की कोशिश कर रही थी। यह दृश्य देखते ही बनता था। सभी श्रद्धालु एक बार अपने सिर में मटकी रखकर नाचने की कोशिश में दिख रहे थे।

उल्टी परिक्रमा कर ठगिनी माया को दिखाई पीठ

आज प्रात: से ही मंदिर में सुन्दरसाथ श्रीजी की सवारी का हिस्सा बनने तथा रास के बाद माया, जो सभी प्राणीमात्र को अपने दुस्स्वभाव पर नचाकर परमधाम जाने की राह में रोड़ा अटकाती है, को पीठ दिखाकर उल्टी परिक्रमा कर यह जताने का प्रयास किया कि “हे माया ठगिनी अब हमें पारब्रह्म से मिलने में तुम हमारा रास्ता नहीं रोक सकतीं।” तत्पश्चात झीलना सम्पन्न कर विभिन्न प्रकार के गीतों, वाणी गायन, नृत्यों तथा मनमोहक संगीत की धुन पर जब श्रीजी की सवारी रासमण्डल से निकली तो धाम के धनी की जयकार व प्राणनाथ प्यार्रे की जयकार से पन्ना का आसमान गूंज उठा।

सुंदरसाथ ने रासमण्डल में उतारी आरती

शनिवार की सुबह जब यह महारास अपने समापन पर था और रासमण्डल ब्रम्हचबूतरे पर श्रद्धालु उपस्थित थे। सुबह लगभग 08:30 बजे श्रीजी की रासमण्डल में आरती की गई जिसमें उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने एक साथ आरती कर अपने आपको धन्य महसूस किया।

मंदिर ट्रस्ट ने व्यक्त किया आभार

विजय दशहरा से पंचमी तक चले अंतरराष्ट्रीय शरद पूर्णिमा महोत्सव के समापन उपरांत श्री 108 प्राणनाथ जी मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी एवं ट्रस्टियों ने इस महोत्सव के सफल आयोजन में सहयोग करने वाले समस्त जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, नगर पालिका प्रशासन, व्यापार मंडल सहित समाजसेवियों व समाज के लोगों का आभार व्यक्त किया और आगे भी सहयोग की अपेक्षा की।

रिपोर्ट: राकेश कुमार शर्मा

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