
जबलपुर। मध्यप्रदेश की विद्युत पारेषण व्यवस्था के इतिहास में एक भावुक और गौरवपूर्ण अध्याय उस समय जुड़ गया, जब एमपी ट्रांसको के बैतूल जिला स्थित सारणी 220 केवी सबस्टेशन में स्थापित 100 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर लगातार 45 वर्षों तक निर्बाध सेवाएं देने के बाद सम्मानपूर्वक रिटायर हो गया।
45 वर्षों तक दी निर्बाध सेवाएं
ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि सन् 1978 में निर्मित इस ट्रांसफार्मर की निर्धारित कार्य अवधि लगभग 25 वर्ष थी, किंतु मध्यप्रदेश विद्युत मंडल तथा बाद में मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के इंजीनियरों एवं तकनीकी कर्मचारियों की कुशल मेंटेनेंस, सटीक तकनीकी प्रबंधन और उत्कृष्ट कार्य दक्षता के कारण इसने लगभग दोगुनी अवधि तक विश्वसनीय सेवाएं प्रदान कीं।
प्रदेश की बिजली व्यवस्था में रहा अहम योगदान
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि सारणी ताप विद्युत गृह से उत्पादित बिजली को प्रदेश के विभिन्न हिस्सों तक सुरक्षित एवं सतत रूप से पहुंचाने में इस ट्रांसफार्मर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बीते साढ़े चार दशकों में इसने प्रदेश की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती देने के साथ औद्योगिक, कृषि एवं सामाजिक विकास की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
भावुक विदाई के साथ नई तकनीक की शुरुआत
एमपी ट्रांसको के कार्मिकों ने इस ऐतिहासिक ट्रांसफार्मर को भावुक विदाई देते हुए उसकी दीर्घ और समर्पित सेवाओं को याद किया। पुराने 100 एमवीए पावर ट्रांसफार्मर के स्थान पर अब सारणी 220 केवी सबस्टेशन में 160 एमवीए क्षमता का अत्याधुनिक पावर ट्रांसफार्मर सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत कर दिया गया है, जिससे क्षेत्र की पारेषण क्षमता और विद्युत विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
बढ़ी क्षमता, बेहतर सप्लाई
एमपी ट्रांसको के अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेश शांडिल्य ने बताया कि नए पावर ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने के बाद 220 केवी सबस्टेशन सारणी की क्षमता बढ़कर 320 एमवीए हो गई है। इससे तीन 132 केवी सबस्टेशनों को लाभ मिलेगा। इसके अलावा रेलवे ट्रैक्शन घोड़ाडोंगरी के दोनों फीडरों को भी अब अधिक गुणवत्ता और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी।