16 मई को ऐसा दुर्लभ संयोग… वट सावित्री व्रत के साथ जुड़ी यह बड़ी खास बात

जबलपुर। 14 मई से त्रिदिवसीय वट सावित्री व्रत का शुभारंभ हो रहा है, जबकि मुख्य व्रत 16 मई को रखा जाएगा। ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि पर मनाए जाने वाले इस व्रत का विशेष महत्व होता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और तरक्की के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।

अमावस्या तिथि और शुभ मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे के अनुसार अमावस्या तिथि 15 मई को रात्रि 3:53 बजे से प्रारंभ होकर 16 मई को रात्रि 1:43 बजे तक रहेगी। इस कारण यह व्रत शनैश्चरी अमावस्या के रूप में मनाया जाएगा, जिससे इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है।

दुर्लभ संयोग से विशेष बना यह पर्व

इस बार वट सावित्री व्रत के दिन शनैश्चरी अमावस्या और शनि जयंती का शुभ संयोग बन रहा है। साथ ही शनिवार 16 मई को वृष राशि में सूर्य और चंद्रमा के एक साथ होने से यह दिन और अधिक फलदायी माना जा रहा है।

वट सावित्री व्रत का महत्व

हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है। इस दिन विवाहित स्त्रियां अपने अखंड सौभाग्य के लिए व्रत रखती हैं। मान्यता है कि माता सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। इसी कारण इस व्रत को अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

वट वृक्ष की पूजा का धार्मिक महत्व

इस दिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करती हैं। वट वृक्ष की लंबी आयु को देखते हुए इसे पति की दीर्घायु का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि वट सावित्री व्रत के दिन बरगद के पेड़ की पूजा करने से यमराज के साथ त्रिदेवों की कृपा भी प्राप्त होती है।

शनैश्चरी अमावस्या का महत्व

इस बार वट सावित्री व्रत के दिन शनैश्चरी अमावस्या का संयोग बन रहा है, जिसमें स्नान और दान का विशेष महत्व होता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर पितरों के नाम से तर्पण करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह तिथि स्नान, दान और श्राद्ध के लिए अत्यंत पुण्यकारी मानी गई है।

व्रत के नियम

वट सावित्री व्रत के दिन काले, नीले और सफेद रंग के वस्त्र धारण नहीं करना चाहिए और न ही इन रंगों के श्रृंगार का उपयोग करना चाहिए। इस दिन सुहाग का शुभ रंग लाल माना गया है, इसलिए लाल साड़ी पहनकर सोलह श्रृंगार करना चाहिए। व्रत के दौरान वट वृक्ष की पूजा और व्रत कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए।

पूजा के बाद करें यह प्रार्थना

वट सावित्री व्रत के दिन पूजा के पश्चात सावित्री माता और यम देवता से अपने सुहाग की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करनी चाहिए।

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