
जबलपुर। श्रीमद्भागवत मात्र कथा नहीं है, बल्कि जीवन का सार है। वर्तमान युग में युवाओं को जोड़कर सनातन संस्कृति के विस्तार के लिए सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण में सुखमय एवं तनाव मुक्त जीवन जीने के ब्रम्ह सूत्र कथा से प्राप्त होते हैं। श्रीमद् भागवत श्रीहरि नारायण का वांग्मय स्वरूप है।
हरिनाम स्मरण ही कलयुग में समाधान
कलयुग में हरिनाम स्मरण ही सभी दुःखों का समाधान है। उक्त उद्गार श्रीमद् जगतगुरु नरसिंह पीठाधीश्वर डॉक्टर स्वामी नरसिंह देवाचार्य जी महाराज ने व्यक्त किए। वे श्री आदर्श केशरवानी वैश्य समाज संगठन द्वारा 14 मई से 21 तक आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिवस कलश यात्रा एवं श्रीमद् भागवत महात्म्य के दौरान दुर्गा मंदिर कैलाशपुरी हाथीताल जबलपुर में संबोधित कर रहे थे।
कलश यात्रा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
कलश यात्रा में पीत वस्त्र धारण कर बड़ी संख्या में मातृशक्ति शामिल हुई। बैंड बाजा, रथ पर आरूढ़ महाराज श्री और ध्वज वाहक भक्तजन यात्रा में शामिल रहे। यात्रा का मार्ग में जगह-जगह स्वागत वंदन किया गया।
व्यास पीठ का पूजन और आरती
इस अवसर पर श्रीमद्भागवत महापुराण के यजमान कर्पूरचंद्र केशरवानी सहित श्री हरिबंश निर्मला गुप्ता, पार्षद निशा राठौर, नारायण, शान्ती गुप्ता, श्रीहरी शंकर, कान्ती देवी गुप्ता, कुंजबिहारी गुप्ता, हिन्छलाल गुप्ता, शिवदीन गुप्ता (ज्ञानी), रामरूप, कन्हैया लाल गुप्ता, मूलचन्द्र गुप्ता, केदारनाथ गुप्ता, रामदिनेश सेन एवं श्रीमती सुभद्रा सेन ने व्यास पीठ पूजन, अर्चन एवं आरती की।