भगवान सदैव करते हैं भक्तों का हित: जगतगुरु नरसिंह देवाचार्य जी महाराज

जबलपुर। भगवान श्रीहरि भक्तों का सदैव परम हित करते हैं। श्रीहरि के मार्ग में संयम, नियम, ब्रह्मचर्य आदि का पालन करना आवश्यक होता है। जो भक्त भीतर से अपने मन को नियंत्रित कर सकते हैं, वही धर्म के मार्ग पर चल सकते हैं।

इन्द्रियों के स्वामी हैं भगवान

भगवान हृषिकेश हैं, अर्थात इन्द्रियों के स्वामी हैं। उनके स्मरण से इन्द्रियां भगवान की दासी बन जाती हैं और उनकी सेवा करने लगती हैं, जिससे वे सांसारिक जीवन में भटकती नहीं हैं।

परहित और संयम से मिलता है सुख

मनुष्य को अपनी दैनिक चर्या के साथ ही संसार और समाज के हित में कार्य करना चाहिए, जिससे पूर्व जन्म के पापों से मुक्ति मिलती है और वर्तमान व भविष्य सुखमय बनता है। मनुष्य को स्वयं को कभी बड़ा नहीं समझना चाहिए और निरंतर परहित के कार्य करते रहना चाहिए।

निष्काम भक्ति से मिलती है आत्मिक शांति

निष्काम भाव से की गई भक्ति से मन और आत्मा को शांति प्राप्त होती है। केवल भगवान ही परम सत्ता हैं और उन्हीं की भक्ति जीवन को सार्थक बनाती है।

भागवत कथा के द्वितीय दिवस दिया संदेश

उक्त उद्गार श्रीमद् जगतगुरु नरसिंह पीठाधीश्वर डॉक्टर स्वामी नरसिंह देवाचार्य जी महाराज ने व्यक्त किए। वे श्री आदर्श केशरवानी वैश्य समाज संगठन द्वारा 14 मई से 21 तक आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस श्रीमद् भागवत महापुराण में दुर्गा मंदिर कैलाशपुरी हाथीताल जबलपुर में संबोधित कर रहे थे।

व्यास पीठ पूजन और आरती

इस अवसर पर श्रीमद्भागवत महापुराण में व्यास पीठ का पूजन-अर्चन एवं आरती मंत्री राकेश सिंह, यजमान कर्पूरचंद्र केशरवानी सहित श्री हरिबंश निर्मला गुप्ता, प्रशांत गुललन दुबे, पार्षद निशा राठौर, नारायण, शान्ती गुप्ता, श्रीहरी शंकर, कान्ती देवी गुप्ता, कुंजबिहारी गुप्ता, हिन्छलाल गुप्ता, शिवदीन गुप्ता (ज्ञानी), रामरूप, कन्हैया लाल गुप्ता, मूलचन्द्र गुप्ता, केदारनाथ गुप्ता, रामदिनेश सेन एवं सुभद्रा सेन ने किया।

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