
राजीव उपाध्याय
पिछले दिन दो मामले सुर्खियों में रहे। पहला मामला कोलकाता का है जिसमें लॉ कॉलेज की छात्रा से उसके प्रेमी ने दुष्कर्म किया। आरोपी पीडि़ता से शादी के लिए दबाव बना रहा था। यह एकतरफा प्रेम था, लड़की उस लड़के से प्रेम नहीं करती थी।
दूसरा मामला नरसिंहपुर का है जिसमें नर्सिंग छात्रा की गला रेतकर एक युवक ने उसकी हत्या कर दी। आरोपी का कहना है कि वह पहले उससे बात करती थी लेकिन अचानक उसने उसे इग्नोर करना शुरू कर दिया।
प्यार जब फितूर बन जाए तो इंतहा होती है
दोनों ही मामलों में मनोचिकित्सक का कहना है कि प्यार जब फितूर बन जाता है तो ब्रेन के अंदर केमिकल लोचा होता है जिससे वह व्यक्ति पॉवर दिखाता है या उसके अंदर डर समा जाता है कि कोई तीसरा उन दोनों के बीच आ रहा है। इन दोनों स्थितियों में जब व्यक्ति एक्सट्रीम स्थिति पर पहुंच जाता है तो यह हिंसात्मक कदम उठा सकता है।
कोलकाता का मामला
साउथ कोलकाता में लॉ कॉलेज की एक छात्रा से आरोपी ने दुष्कर्म किया। कॉलेज के पूर्व छात्र ने यह किया उसका सहयोग उसके दो साथियों ने दिया। पीडि़ता का आरोप है कि एक पूर्व छात्र ने उस पर शादी करने का दबाव बनाया था। लेकिन उसने इंकार कर दिया। उसने उसे नुकसान पहुंचाने की धमकी भी दी थी। उस रात वह उसे जबरन कमरे में ले गया और उसने उसके साथ दुष्कर्म किया। उसके दो साथियों ने उसका साथ दिया।
नरसिंहपुर का मामला
नरसिंहपुर में जिला अस्पताल में नर्सिंग की छात्रा संध्या की गला रेतकर हत्या कर दी। छात्रा इमरजेंसी वार्ड के बाहर बैठी थी आरोपी अभिषेक कोष्टी आया और उस पर वार कर दिया। इस केस में कि पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि संध्या पहले उससे बात करती थी। लेकिन पिछले तीन माह से उसने अचानक बात करना बंद कर दिया।
उसने संध्या को मनाने की कोशिश की लेकिन वह नहीं मानी तब उसने उसकी हत्या कर दी। आरोपी ने कहा कि उसे इस बात का शक हो गया था कि कोई तीसरा व्यक्ति उन दोनों के बीच आ गया है। इस मामले में नरसिंहपुर एसपी मृगाखी डेका का कहना है कि शुरूआती जांच में यही लग रहा है कि हत्या का कारण प्रेम प्रसंग है।
यह कहना है मनोचिकित्सक का
प्यार में यदि कोई किसी पक्ष के साथ बुरा सलूक करता है या उसकी परिणिति इस हद तक होती है कि एक पक्ष दूसरे को शारीरिक नुकसान पहुंचा दे तो इसके कई कारण हैं। एक कारण तो यह है कि प्यार में रिजेक्शन जब होता है तो यह भावना या तो डिप्रेशन लाती है या दूसरे पक्ष को अपना पॉवर दिखाती है। वह किसी भी रूप में हो।
यदि ब्रेकअप हो जाए तो भी डिप्रेशन हो सकता है या अंदर से गुस्सा निकलता है दूसरे पक्ष को डेमेज करने का ख्याल आ सकता है। या पर्सनालिटी प्राब्लम होती है। जिसमें यह ख्याल आता है कि वो मेरी नहीं हो सकी तो किसी और का भी नहीं होने दूंगा। इस विषय पर डर फिल्म बनी थी। लेकिन हर केस में यह अलग अलग होता है।
इन केस में जांच के बाद ही कह सकते हैं कि ऐसा इन लोगों ने क्यों किया। हालांकि जब भी व्यक्ति प्यार में होता है तो ब्रेन में कई तरह के केमिकल लोचा होते रहते हैं। वह प्यार की विभिन्न स्थितियों में ब्रेन पर असर डालते हैं और व्यक्ति कुछ अलग तरह का यानि उम्मीद से परे कदम उठा लेता है।
डॉ ओपी रायचंदानी
एचओडी एंड प्रोफेसर मनोरोग विभाग
नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर