हिंदी विश्वसनीयता और सुदृढ़ता के साथ खड़ी है : डॉ. अरुण शुक्ल

हिंदी प्रश्न मंच में 50 कर्मचारियों ने आजमाया ज्ञान, ‘सदाचार का ताबीज’ ने व्यवस्था पर किया व्यंग्य

जबलपुर। बदलते दौर में कई भाषाओं के अस्तित्व पर संकट के बावजूद हिंदी निरंतर मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। करोड़ों लोगों का हिंदी के प्रति जुड़ाव और रोजमर्रा के जीवन में इसका व्यापक इस्तेमाल इसकी सबसे बड़ी ताकत है। यह विचार महाकोशल महाविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण शुक्ल ने मध्यप्रदेश विद्युत परिवार हिंदी समिति के हिंदी महोत्सव के तहत आयोजित प्रश्न मंच प्रतियोगिता में व्यक्त किए।

शक्तिभवन स्थित केंद्रीय ग्रंथालय में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. शुक्ल ने कहा कि जिस क्षेत्र और देश में हम रहते हैं, वहां की प्रमुख भाषा को व्यवहार में प्राथमिकता देना स्वाभाविक है। हालांकि, दूसरी भाषाओं से प्रचलन में आए शब्दों को अपनाने में भी किसी तरह की झिझक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने भाषा को निरंतर प्रयोग में बनाए रखने पर जोर दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्यप्रदेश विद्युत परिवार हिंदी समिति के अध्यक्ष एवं कार्यपालक निदेशक मानव संसाधन एवं प्रशासन फिरोज कुमार मेश्राम ने की। इस दौरान समिति की ओर से डॉ. शुक्ल को शॉल, श्रीफल एवं सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया।

भाषा से जुड़ाव बनाए रखना जरूरी

फिरोज कुमार मेश्राम ने कहा कि आम बोलचाल में हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग होना चाहिए। भाषा हमारे विचारों और भावनाओं को दूसरों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। जटिल विषयों को सहज ढंग से समझाने में भी भाषा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि जब भाषा निरंतर हमारा साथ दे रही है तो उसके प्रति हमारा जुड़ाव भी कायम रहना चाहिए।

30 मिनट में 50 सवालों के जवाब

हिंदी महोत्सव के दूसरे दिन आयोजित प्रश्न मंच प्रतियोगिता में विद्युत कंपनियों के 50 कार्मिकों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों को 30 मिनट में हिंदी एवं सामान्य ज्ञान से जुड़े 50 वस्तुनिष्ठ प्रश्न हल करने थे। प्रतियोगिता के दौरान कर्मचारियों में खासा उत्साह देखने को मिला।

व्यंग्य के जरिए सामाजिक विसंगतियों पर प्रहार

कार्यक्रम में विवेचना थिएटर ग्रुप के बाल कलाकारों ने आदित्य रूसिया के निर्देशन में हरिशंकर परसाई की व्यंग्य रचना पर आधारित ‘सदाचार का ताबीज’ नाटक प्रस्तुत किया। नाटक के माध्यम से आडंबर, पाखंड, दोहरे चरित्र, ढोंग और भ्रष्टाचार जैसे सामाजिक मुद्दों को प्रभावी ढंग से सामने रखा गया।

नाटक में इहान भटेले तिवारी, अर्हम जैन, एकाक्ष मरवाहा, हृदयांश चौकसे, रिया पांडे, अर्शवीर सिंह सूरमा और अस्तित्व शुक्ला ने अभिनय किया। मंचन में पल्लव शुक्ला ने सहयोग दिया।

पुस्तक प्रदर्शनी में साहित्य की झलक

हिंदी महोत्सव के तहत त्रिलोक सिंह स्मृति पुस्तकालय की ओर से हिंदी साहित्य की पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। अजय और मनु यादव द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी में हिंदी साहित्य की चर्चित पुस्तकों के साथ विश्व साहित्य की हिंदी में अनूदित कृतियों को भी प्रदर्शित किया गया।

कार्यक्रम का संचालन अंकिता सिंह ने किया। इस अवसर पर पावर मैनेजमेंट कंपनी के अतिरिक्त मुख्य महाप्रबंधक अनुराग नायक, महाप्रबंधक प्रशासन एवं हिंदी समिति के उपाध्यक्ष नितिन खत्री, हिंदी महोत्सव के संयोजक दीपक निगम सहित विद्युत कंपनियों के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

आज तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता

हिंदी महोत्सव का समापन 17 सितंबर को दोपहर 3 बजे शक्तिभवन स्थित केंद्रीय ग्रंथालय में होगा। इस अवसर पर तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। समापन समारोह में अहिंदी भाषी और मंचीय हास्य प्रस्तुति की शुरुआत करने वाले केके (कृष्ण कुमार) नायकर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। हिंदी के प्रचार-प्रसार में योगदान के लिए हिंदी समिति द्वारा उन्हें सम्मानित किया जाएगा।