
जबलपुर। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश उपाध्यक्ष (ओबीसी विभाग) एवं पूर्व प्रदेश प्रवक्ता टीकाराम कोष्टा ने कहा कि जबलपुर मेडिकल कॉलेज को दो टुकड़ों में विभाजित करने के बाद प्रदेश सरकार ने नौ मेडिकल कॉलेजों को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि इससे इलाज महंगा होगा।
पूर्व की सरकारें सभी लोगों को शिक्षा और स्वास्थ्य उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध रही हैं। इसी उद्देश्य से सरकारी मेडिकल कॉलेजों का निर्माण कराया गया, ताकि देश के हर बच्चे को अच्छी स्वास्थ्य शिक्षा मिल सके। सरकारी स्कूलों और अस्पतालों का भी निर्माण कराया गया। आज की सरकार उनमें सुधार करने की बजाय सभी को निजी हाथों में सौंपकर अपने उत्तरदायित्व से मुक्त होना चाहती है।
आज की सरकार ने शिक्षा में सुधार करने के बजाय देश के लगभग 94 हजार सरकारी स्कूल और मध्य प्रदेश सरकार ने 29 हजार सरकारी स्कूलों को बंद कर दिया। अब मोदी-मोहन सरकार मेडिकल कॉलेजों का निजीकरण करके मेडिकल की शिक्षा और इलाज को महंगा करने पर उतारू है। देश के सारे मेडिकल कॉलेज सरकारी जमीनों पर बने हैं और उनके भवन, फर्नीचर तथा मशीनें जनता के टैक्स से बनी हैं। ऐसे में इन्हें निजी हाथों में सौंपना यह साबित करता है कि मोदी सरकार इन्हें चलाने में असफल एवं नाकाम है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओबीसी विभाग) के प्रदेश उपाध्यक्ष टीकाराम कोष्टा, प्रदेश कोऑर्डिनेटर अलीम मंसूरी, विजय अग्रवाल, रामदास यादव, मामूर गुड्डू, अशोक यादव, अनिल गुप्ता, धर्मेंद्र कुशवाहा, श्याम सोलंकी, राकेश व्योहार, राजा खान, डॉ. मोइन अंसारी, संजू शर्मा आदि ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों को निजी हाथों में सौंपने से केवल इलाज ही महंगा नहीं होगा, बल्कि एमबीबीएस की शिक्षा भी महंगी हो जाएगी। इससे केवल पूंजीपतियों की संतानें ही डॉक्टर बन सकेंगी। उन्होंने सरकार से मांग की है कि जनहित में मेडिकल कॉलेजों को निजी हाथों में न सौंपा जाए।
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