
जबलपुर। गौरीघाट क्षेत्र के ललपुर रोड पर पीएचई कार्यालय के पहले स्थित श्री सिद्ध रजत गणेश मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। यहां विराजमान चांदी वाले गणेश जी की प्रतिमा न केवल अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि मंदिर में होने वाली नियमित पूजा-अर्चना और मनोकामना की अनूठी परंपरा भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।
संस्थापक स्वामी प्रमोद महाराज ने बताया कि वर्ष 2011 में मंदिर में पहली बार चांदी की गणेश प्रतिमा स्थापित की गई थी। स्थापना के बाद से प्रतिमा का स्वरूप लगातार बढ़ता गया। प्रारंभ में सवा पांच किलोग्राम की चांदी की प्रतिमा स्थापित की गई थी। इसके बाद सवा 11 किलो, 21 किलो और 31 किलो की प्रतिमाओं के बाद वर्तमान में 41 किलोग्राम चांदी की गणेश प्रतिमा विराजमान है। मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार वर्तमान प्रतिमा का मूल्य एक करोड़ रुपये से अधिक है।
भक्तों की श्रद्धा से बढ़ता गया प्रतिमा का स्वरूप
मंदिर की परंपरा के अनुसार श्रद्धालु भगवान गणेश के समक्ष अपनी मनोकामना लेकर अर्जी लगाते हैं। इसके लिए नारियल के साथ मंदिर में रखे रजिस्टर में अपनी अर्जी लिखी जाती है। मनोकामना पूरी होने के बाद श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार चांदी अर्पित करते हैं। भक्तों द्वारा अर्पित इसी चांदी के सहयोग से समय-समय पर गणेश जी की प्रतिमा का निर्माण कराया गया। इस तरह प्रतिमा का स्वरूप सवा पांच किलो से बढ़कर वर्तमान में 41 किलो तक पहुंच गया।
प्रतिदिन होता है सहस्रार्चन और महाभिषेक
मंदिर में भगवान श्री गणेश की नियमित विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। प्रतिदिन गणेश जी का 1000 नामों से सहस्रार्चन किया जाता है। इसके साथ अथर्वशीर्ष पाठ के बीच महाभिषेक की परंपरा भी निभाई जाती है। पूजा में इस्तेमाल होने वाले पंचपात्र भी चांदी के हैं।
हर दिन अलग रंग में श्रृंगार
मंदिर में भगवान गणेश का प्रतिदिन दिन के अनुसार अलग-अलग रंगीन वस्त्रों से आकर्षक श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद महाआरती होती है। मंदिर में प्रतिदिन भंडारे का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं।
चांदी की भव्य प्रतिमा, नियमित पूजा-अर्चना और श्रद्धालुओं की मनोकामना से जुड़ी परंपरा के कारण श्री सिद्ध रजत गणेश मंदिर जबलपुर के धार्मिक स्थलों में अपनी अलग पहचान रखता है।