एआई के साथ भारत का भविष्य असाधारण होने वाला है: सुंदर पिचाई

नईदिल्ली। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 को संबोधित करते हुए गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को इस दशक की सबसे निर्णायक ताकत बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक सहयोग के माध्यम से ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि एआई के लाभ सभी तक पहुँचें।

एआई का लाभ सभी तक पहुंचे

सुंदर पिचाई ने कहा कि “हम शानदार प्रगति और नई खोजों के युग की दहलीज पर हैं, लेकिन सर्वोत्तम परिणाम स्वतः सुनिश्चित नहीं हैं। हमें मिलकर काम करना होगा ताकि एआई के लाभ सभी तक और हर जगह पहुंचें।” उन्होंने तेज़ी से हो रहे नवाचार के साथ आने वाली जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया।

द्विपक्षीय सहयोग के रणनीतिक महत्व पर बल देते हुए पिचाई ने कहा, “अमेरिका-भारत साझेदारी की महत्वपूर्ण भूमिका है।” भारत के नेतृत्व पर विश्वास जताते हुए उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि एआई के क्षेत्र में भारत की यात्रा असाधारण होगी और हम उत्पादों, विस्तार और अवसंरचना सहित पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ इसका समर्थन कर रहे हैं।”

गूगल के प्रयासों के तीन स्तंभ

उन्होंने गूगल के प्रयासों को तीन प्रमुख स्तंभों—उत्पाद, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे—में विभाजित किया। उन्होंने कहा कि एआई के माध्यम से किसानों को समय पर मानसून पूर्वानुमान दिए जा रहे हैं और स्वास्थ्यकर्मियों को डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी बीमारियों की जांच में मदद मिल रही है। भारतीय भाषाओं में एआई टूल्स की पहुंच भी बढ़ाई जा रही है।

कौशल विकास के क्षेत्र में उन्होंने बताया कि “एआई स्किल हाउस के माध्यम से हम 1 करोड़ (10 मिलियन) भविष्य के भारतीय नेताओं को वैश्विक प्रगति के लिए आवश्यक उपकरण प्रदान कर रहे हैं।” बुनियादी ढांचे के संदर्भ में पिचाई ने भारत में गूगल के 15 अरब डॉलर के निवेश का उल्लेख किया, जिसमें विशाखापट्टनम में स्थापित किया जा रहा एआई हब भी शामिल है।

कनेक्ट इंडिया–अमेरिका पहल

उन्होंने इंडिया–अमेरिका कनेक्ट पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि समुद्री केबल के माध्यम से वैश्विक कनेक्टिविटी का विस्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा, “स्थिर और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाओं के बिना यह संभव नहीं होगा, जो साझा विश्वास की नींव पर आधारित हों।”

लोकसभा अध्यक्ष का संबोधन

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने “एआई फॉर डेमोक्रेसी” सत्र को संबोधित करते हुए डीपफेक और भ्रामक सूचना को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग सत्य और विश्वसनीयता को सुदृढ़ करने के लिए किया जाना चाहिए।

उन्होंने “डिजिटल संसद” और “संसद भाषिणी” पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि एआई आधारित अनुवाद और डेटा प्रणाली लोकतंत्र को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बना रही है। एआई उपकरणों की सहायता से संसदीय बहसों को खोजने योग्य और सार्वजनिक रूप से सुलभ बनाया गया है।

पैक्स सिलिका में भारत शामिल

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान भारत अमेरिका की अगुवाई वाले पैक्स सिलिका समूह में 10वें सदस्य के रूप में शामिल हुआ। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इससे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम, सप्लाई चेन और चिप डिजाइन को बढ़ावा मिलेगा।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार द्वारा गठित इस समूह का उद्देश्य एआई तकनीक का विकास और क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन को मजबूत करना है। इससे भारत में डेटा सेंटर और क्लाउड कंप्यूटिंग निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।

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