
राजीव उपाध्याय
पश्चिम बंगाल में इस बार ऐतिहासिक विधानसभा चुनाव हुआ। चुनाव आयोग के द्वारा चुनाव कराने की व्यवस्था से लेकर वोटिंग तक सब कुछ ऐतिहासिक है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। चुनाव आयोग के अनुसार पहले व दूसरे चरण को मिलाकर आजादी के बाद किसी बड़े राज्य में सर्वाधिक मतदान हुआ। चुनाव परिणाम 4 मई को आने हैं। उसमें भगवा की सुनामी चले या दीदी की आंधी, दोनों ही स्थितियों में पश्चिम बंगाल नया इतिहास रचेगा।
महिला वोटर्स का ट्रेंड
पश्चिम बंगाल में पहले व दूसरे फेस का कुल मतदान 92.93 % रहा। जिसमें दोनों चरणों में महिला वोटर्स का कुल मतदान 93.28 % व पुरुष वोटर्स का कुल मतदान 91.75 % रहा। यानी महिलाओं ने पुरुषों से करीब डेढ़ प्रतिशत अधिक मतदान किया। महिलाओं का यह बढ़ा हुआ यह वोट प्रतिशत किसी भी राजनीतिक पार्टी की जीत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
कड़ी सुरक्षा के बीच चुनाव
पश्चिम बंगाल भाजपा के लिए कड़ी परीक्षा रही है। वहीं टीएमसी सुप्रीमो ममता बैनर्जी के लिए भी कड़ी चुनौती है। चुनाव आयोग ने जिस तरह से पूरी फोर्स लगाकर यह चुनाव करवाया, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। हालांकि इसका परिणाम बेहतर ही रहा। जिससे छुटपुट घटनाओं को छोड़कर कोई हिंसा नहीं हुई। इस तरह की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में चुनाव, टीएमसी ने पहली बार लड़ा।
बेहतर रणनीति
भाजपा और टीएमसी ने जिस तरह से चुनाव लड़ा वह बिना बेहतर रणनीति बनाए मुश्किल था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का यह स्वप्न रहा है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बने। इसके लिए अमित शाह ने अपने विश्वसनीय सुनील बंसल को पश्चिम बंगाल का प्रभारी बनाया। सुनील बंसल चुनाव के अच्छे रणनीतिकार हैं। वे पिछले 6 माह से पश्चिम बंगाल में रहकर वहां चुनाव की रणनीति बना रहे थे। इसका फीडबैक वे अमित शाह को देते थे।
हालांकि भूपेंद्र यादव भी उनके साथ थे लेकिन मुख्य रूप से सुनील बंसल ने चुनाव की बागडौर संभाली थी। उन्होंने दोनों चरणों के चुनाव की पूरी तैयारी की थी। भाजपा में खास बात यह है कि इनका संगठन बहुत मजबूत है। इससे किसी भी राज्य में चुनाव हों, इसके बेहतर परिणाम भाजपा को मिल रहा है। वहीं टीएमसी के लिए यह सोच के बाहर की बात हो गई कि उसे इतने कठिन चुनाव से गुजरना पड़ेगा। इसके बाद भी टीएमसी ने अपनी पूरी शक्ति लगाकर यह चुनाव लड़ा।
किसके मुद्दे कारगर
पश्चिम बंगाल के दोनों चरणों का चुनाव एसआइआर, डर, वोटर्स का ध्रुवीकरण इस तरह के मुद्दों को लेकर केंद्रित रहा। टीएमसी ने जहां एसआइआर को मुद्दा बनाया, वहीं भाजपा ने चुनाव के दौरान लोगों को हिंसा होने के डर को दूर भगाया और वोट करने अपील की। रोजगार, भ्रष्टाचार, विकास के मुद्दे कहीं खो गए। कांग्रेस का 2021 के चुनाव में खाता भी नहीं खुला था। वह टीएमसी के विरोध में पश्चिम बंगाल में मुखर रही। जबकि इंडिया गठबंधन से सपा से अखिलेष यादव और आप से अरविंद केजरीवाल ने टीएमसी के पक्ष में प्रचार किया।
भाजपा के लिए बड़ा मौका
यदि बीजेपी पश्चिम बंगाल में सरकार बनाती है तो उसके लिए बड़ी जीत होगी क्योंकि ऐसा पहली बार होगा। इतिहास में भाजपा का चुनाव लड़ने की रणनीति को याद किया जाएगा। यदि इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और बेहतर रणनीति से चुनाव लड़ने के बाद भी भाजपा कहीं पीछे रह जाती है तो भाजपा के लिए बड़ी चोट होगी।
टीएमसी को मौका मिला तो बनेगा इतिहास
यदि टीएमसी की सरकार पश्चिम बंगाल में बनती है तो यह ममता बैनर्जी की ऐतिहासिक जीत होगी क्योंकि कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच टीएमसी ने चुनाव लड़ा है। वहीं टीएमसी 2011 से सत्ता में है, इस तरह से पिछले 15 साल की एंटी इंकंबेंसी भी रही है। यदि इसके बावजूद चुनाव परिणाम टीएमसी के पक्ष में जाता है तो ममता बैनर्जी विपक्ष की बड़ी नेता बनेंगी। इंडिया गठबंधन में उनकी मुख्य भूमिका हो सकेगी। वहीं उनकी नजर दिल्ली पर होगी।
ये था इस चुनाव में खास
– आजादी के बाद किसी राज्य में सर्वाधिक मतदान।
– पहली बार किसी राज्य में चुनाव पर सर्वाधिक सुरक्षा बलों की तैनाती।
– पश्चिम बंगाल में चुनाव में हिंसा नहीं हुई।
– मतदाता ने बिना डरे मतदान किया।
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