भक्तमाल कथा संपन्न, 29 जुलाई को गुरु चरण पूजन और विशाल भंडारा

राकेश कुमार शर्मा

पन्ना। श्री जुगल किशोर सरकार सप्तनिधि धाम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अंतर्गत आयोजित 15 दिवसीय भक्तमाल कथा का सोमवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के बीच भव्य समापन हुआ। अंतिम दिवस परम पूज्य रसिकाचार्य महंत श्री श्री 108 स्वामी किशोर दास जी महाराज ने भगवान श्री जुगल किशोर सरकार के दिव्य प्राकट्य की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुन हजारों श्रद्धालु भक्तिरस में सराबोर हो गए।

भगवान श्री जुगल किशोर सरकार के दिव्य प्राकट्य का वर्णन

महंत श्री ने अपने प्रवचन में भगवान श्री जुगल किशोर सरकार के वृंदावन में दिव्य प्राकट्य की कथा सुनाते हुए बताया कि संत शिरोमणि श्री हरिराम व्यास जी को स्वप्न में मिले निर्देश के अनुसार भगवान श्री राधारानी के साथ युगल स्वरूप में प्रकट हुए थे। उन्होंने कहा कि गुरु कृपा और भगवान की अनुकम्पा से ही भक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है तथा सच्चे समर्पण से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है।

वीडियो संदेश से दी शुभकामनाएं

जोधपुर से पूज्य गोवत्स श्री राधाकृष्ण जी महाराज ने वीडियो संदेश के माध्यम से कथा को दिव्य एवं भक्तिरस से परिपूर्ण बताते हुए आयोजन समिति, सेवायत परिवार और श्रद्धालुओं को सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।

पन्ना को धार्मिक पर्यटन केंद्र बनाने का संकल्प

पूर्व मंत्री एवं पन्ना विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने मंदिर के पुजारियों का सम्मान करते हुए कहा कि महोत्सव का उद्देश्य पन्ना को भगवान श्री जुगल किशोर सरकार की पावन नगरी एवं देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने आयोजन में सहयोग देने वाले संतों, सेवकों, प्रशासन, पुलिस, मीडिया तथा सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।

29 जुलाई को गुरु चरण पूजन और विशाल भंडारा

उन्होंने श्रद्धालुओं से 29 जुलाई को टेक्निकल ग्राउंड में आयोजित गुरु चरण पूजन एवं विशाल भंडारे में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की। साथ ही 28 एवं 29 जुलाई को मंदिर परिसर में पहली बार आयोजित होने वाले भव्य फूल बंगला उत्सव के दिव्य दर्शन करने का भी आग्रह किया।

भक्ति और जयघोष के साथ हुआ समापन

समापन समारोह में रामपुर बघेलान के विधायक विक्रम सिंह, अनेक संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। भक्तमाल कथा का समापन श्रद्धा, भक्ति और गुरु महिमा के जयघोष के साथ हुआ।

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