
जबलपुर। “स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है” की सिंहगर्जना करने वाले राष्ट्रपुरुष लोकमान्य बाळ गंगाधर तिलक जी की 106वीं पुण्यतिथि के अवसर पर स्मरणांजलि व व्याख्यान महाराष्ट्र समाज जबलपुर, माजी विद्यार्थी महामंडल के संयुक्त तत्वावधान में निर्माणाधीन तिलक मंदिर महाराष्ट्र समाज भवन श्रीनाथ तलैया में आयोजित किया गया।

लोकमान्य तिलक ने पूर्ण स्वराज्य के साथ भारतवासियों को सांस्कृतिक, सामाजिक, सनातन संस्कृति से जुड़कर विदेशी ताकतों और विधर्मियों से सावधान रहने के लिए जागृत किया। तिलक ने भारत के कोने-कोने में भारतीयों के मन में आजादी के बीजारोपण किया। वर्तमान समय में तिलक के विचारों और शिक्षाओं से ही युवाओं में देशभक्ति और सनातनी परंपरा के पालन का जागरण संभव है, उक्त उद्गार डॉ. सरिका ठोसर, डॉ. स्वाती सदानंद गोडबोले ने कहे।
सामाजिक एकता और राष्ट्रीय स्वाभिमान का दिया संदेश
लोकमान्य टिळक के विचारों से शिक्षा लेकर प्रत्येक भारतीय को सामाजिक एकता, राष्ट्रीय स्वाभिमान, राष्ट्रभक्ति की भावना को जागृत रखना चाहिए। लोकमान्य तिलक ने सार्वजनिक गणेशोत्सव और शिवाजी महाराज जयंती महोत्सव को सामूहिक रूप से मनाने की सोच सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, सामाजिक एकजुटता के लिए स्वर्णिम परिकल्पना है। जिससे हर वर्ग की भागीदारी होती है। वर्तमान परिस्थितियों में युवाओं को तिलक जी के विचारों से परिचित कराने, अध्ययन करने से ही वैचारिक उत्थान संभव है।

पुण्य स्मरण में बड़ी संख्या में सदस्य रहे उपस्थित
लोकमान्य तिलक की पुण्यतिथि पर पुण्य स्मरण में सुरेश मुंजे, माधुरी कानिटकर, सदानंद गोडबोले, पार्षद प्रतिभा भापकर, दीपक मुंजे, पी.पी. फडणवीस, गिरीश मैराळ, दिलीप कुलकर्णी, गौरी साने, मंजु देशमुख, छाया दवंडे, श्रीकांत बापट, मुरली पालंदे, राकेश ताम्हनकर, विध्येश भापकर सहित महाराष्ट्र समाज, जबलपुर, माजी विद्यार्थी महामंडळ के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
रिपोर्ट: विध्येश भापकर