
जबलपुर। देश के कई राज्यों में प्याज के दाम बढ़ गए हैं। खासतौर से त्योहारी सीजन में शक्कर और प्याज के दाम बढ़ने से लोगों के घरों का बजट बिगड़ गया है। दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश व अन्य राज्यों में प्याज के दामों में बढ़ोतरी हुई है।
घरेलू बजट बिगड़ा
प्याज की कीमतों में लगातार तेजी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। रोजमर्रा की सब्जियों में शामिल प्याज अब घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है। बाजार में भाव बढ़ने के कारण उपभोक्ता जरूरत के मुताबिक ही प्याज खरीदने को मजबूर हैं। प्याज 60 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है।
व्यापारी भी चिंतित
व्यापारियों के अनुसार प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव के पीछे मंडियों में आवक और बाजार में उपलब्धता अहम कारण हैं। कुछ स्थानों पर आवक प्रभावित होने से थोक बाजार में कीमतों पर दबाव बना है। इसका असर धीरे-धीरे खुदरा बाजार तक पहुंचा है। अलग-अलग मंडियों में प्याज की गुणवत्ता और उपलब्धता के आधार पर भाव में अंतर भी देखने को मिल रहा है।
गृहणियों का बढ़ा बजट
प्याज महंगा होने का सबसे ज्यादा असर घर के मासिक खर्च पर पड़ रहा है। पहले से महंगाई से जूझ रहे परिवारों के लिए रसोई में इस्तेमाल होने वाली जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ना चिंता का विषय है। कई परिवार अब प्याज की खपत कम करने या सीमित मात्रा में खरीदारी करने पर विचार कर रहे हैं।
होटल-ढाबों पर भी असर
प्याज के बढ़ते भाव का असर होटल, ढाबे और छोटे खाद्य कारोबारियों पर भी पड़ रहा है। भोजन तैयार करने में प्याज का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। कीमत बढ़ने से कारोबारियों की लागत बढ़ रही है। ऐसे में उन्हें अपनी लागत नियंत्रित करने के लिए अन्य विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं।
आवक बढ़ी तो मिल सकती है राहत
सब्जी कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि बाजार में प्याज की पर्याप्त आवक होने पर कीमतों में नरमी आ सकती है। आने वाले दिनों में मंडियों में आवक की स्थिति और मांग के बीच संतुलन कीमतों की दिशा तय करेगा। उपभोक्ताओं को अब उम्मीद है कि प्याज के दाम जल्द सामान्य स्तर पर लौटेंगे और रसोई के बजट को कुछ राहत मिलेगी।