
नई दिल्ली। आल इंडिया आर्गेनाईजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स संगठन (AIOCD) ने राष्ट्रीय जनस्वास्थ्य के व्यापक हित में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अवैध ई-फार्मेसी के कारण उत्पन्न हो रहे एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) पर अंकुश लगाने हेतु तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
मन की बात में प्रधानमंत्री द्वारा व्यक्त चिंता का उल्लेख
एसोसिएशन के अध्यक्ष जे. एस. शिंदे व महासचिव राजीव सिंघल ने पत्र में उल्लेख किया है कि प्रधानमंत्री ने अपने हालिया “मन की बात” कार्यक्रम में एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) की गंभीर एवं तीव्र गति से बढ़ती चुनौती पर देश का ध्यान आकर्षित किया है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की नवीनतम रिपोर्ट का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि निमोनिया एवं मूत्र मार्ग संक्रमण (UTI) जैसी गंभीर बीमारियों में प्रयुक्त एंटीबायोटिक्स तेजी से अप्रभावी होती जा रही हैं, जिसका प्रमुख कारण बिना चिकित्सकीय पर्चे के एंटीबायोटिक्स का अंधाधुंध उपयोग है।
12.40 लाख केमिस्ट्स का प्रतिनिधि संगठन AIOCD
AIOCD, जो देशभर में 12.40 लाख से अधिक लाइसेंसधारी केमिस्ट्स एवं ड्रगिस्ट्स का प्रतिनिधित्व करता है, लंबे समय से यह चेतावनी देता आ रहा है कि बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे के एंटीबायोटिक्स का उपयोग रोगियों की सुरक्षा एवं जनस्वास्थ्य के लिए प्रत्यक्ष खतरा है।
अवैध ई-फार्मेसी से बढ़ रही स्व-चिकित्सा की प्रवृत्ति
यह अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है कि स्व-चिकित्सा (Self-Medication) की बढ़ती प्रवृत्ति और AMR के तीव्र विस्तार को अवैध रूप से संचालित ई-फार्मेसी बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रही हैं। ये ई-फार्मेसी औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम (Drugs and Cosmetics Act) तथा स्थापित नियामक प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए बिना अधिकृत पर्चे के एंटीबायोटिक्स एवं अन्य प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की आपूर्ति कर रही हैं।
टेली-मेडिसिन दिशानिर्देशों का दुरुपयोग
इन अवैध ऑनलाइन फार्मेसियों की कार्यप्रणाली टेली-मेडिसिन दिशानिर्देशों की आड़ में कानूनों को दरकिनार करने पर आधारित है, जहां तथाकथित डॉक्टर और मरीज के बीच कॉल की व्यवस्था कर केवल दवाओं की बिक्री हेतु औपचारिकता मात्र का पर्चा जारी कराया जाता है।
दिल्ली हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कार्रवाई नहीं
इन अनियमितताओं को विभिन्न एजेंसियों एवं समाचार माध्यमों द्वारा कई बार उजागर किया गया है, किंतु इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई का अभाव नागरिकों के जीवन एवं स्वास्थ्य को गंभीर खतरे में डाल रहा है। उल्लेखनीय है कि माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से यह अवलोकन दिया है कि ई-फार्मेसी अवैध हैं।
भारत सरकार से AIOCD की प्रमुख मांगें
AIOCD ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि सभी अवैध रूप से संचालित ई-फार्मेसियों को तत्काल बंद करने के निर्देश दिए जाएं तथा बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे के ऑनलाइन प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री रोकने हेतु AIOCD का सहयोग लिया जाए।
स्वस्थ भारत – सुरक्षित भारत के लिए प्रतिबद्धता
AIOCD एवं इसके 12.40 लाख सदस्य “स्वस्थ भारत – सुरक्षित भारत” के सरकार के विज़न का पूर्ण समर्थन करते हैं और स्व-चिकित्सा के विरुद्ध जनजागरूकता, एंटीबायोटिक्स के विवेकपूर्ण उपयोग तथा AMR से निपटने के राष्ट्रीय प्रयासों में पूर्ण सहयोग के लिए प्रतिबद्ध हैं।
AIOCD का नारा:
“स्वस्थ भारत – सुरक्षित भारत”
एंटीबायोटिक्स का उपयोग केवल चिकित्सक के पर्चे पर ही किया जाए।