रक्षाबंधन 2025: 97 वर्षों बाद बना है ऐसा शुभ योग, जानें राखी बांधने का उत्तम मुहूर्त

भाई-बहन के प्रेम का पवित्र पर्व

रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह, सुरक्षा और विश्वास का पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र, सुख और समृद्धि की कामना करती हैं। भाई भी अपनी बहनों को जीवनभर उनकी रक्षा का वचन देते हैं। पंचांग के अनुसार, रक्षाबंधन 9 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा। इस वर्ष का रक्षाबंधन खास इसलिए है क्योंकि इस दिन 97 वर्षों बाद अत्यंत शुभ योगों का संयोग बन रहा है।

97 वर्षों बाद बना ऐसा दिव्य योग

इस वर्ष रक्षाबंधन के दिन कई शुभ योग एक साथ बन रहे हैं, जो इसे अत्यंत दुर्लभ और शुभ बनाते हैं। रक्षाबंधन 2025 पर आयुष्मान योग, सर्वार्थसिद्धि योग, सिद्धि योग और सौभाग्य योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। साथ ही शनैश्चरी पूर्णिमा, मकर राशि का चंद्रमा, श्रवण एवं धनिष्ठा नक्षत्र और प्रीति योग भी इस दिन को विशेष बना रहे हैं। ऐसा दिव्य संयोग अंतिम बार वर्ष 1928 में बना था। ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे के अनुसार, यह योग कृषि, पारिवारिक समृद्धि और सामाजिक सौहार्द के लिए अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। 

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भद्रा और ग्रहण का नहीं रहेगा कोई प्रभाव

इस बार रक्षाबंधन पर किसी भी प्रकार की भद्रा या ग्रहण का साया नहीं रहेगा। भद्रा काल रक्षाबंधन से एक दिन पूर्व यानी 8 अगस्त की रात में ही समाप्त हो जाएगा। इसके चलते 9 अगस्त को पूरे दिन राखी बांधने का शुभ समय उपलब्ध रहेगा। इस कारण बहनें बिना किसी समय की चिंता के दिनभर अपने भाइयों को राखी बांध सकेंगी।

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

रक्षाबंधन पर शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। इस बार पूर्णिमा तिथि और मुहूर्त का संयोग अत्यंत शुभ है:
पूर्णिमा तिथि की शुरुआत: 8 अगस्त 2025 को दोपहर 1:17 बजे से
रक्षाबंधन अनुष्ठान का समय: 9 अगस्त को प्रातःकाल से दोपहर 1:07 बजे तक
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 9 अगस्त को दोपहर 12:59 बजे तक
यह संयोग दर्शाता है कि 9 अगस्त को पूरे दिन राखी बांधने के लिए अनुकूल समय उपलब्ध रहेगा, जिससे पर्व का उल्लास और भी बढ़ जाएगा।

क्यों माना जा रहा है यह योग विशेष?

रक्षाबंधन 2025 पर बन रहा यह दुर्लभ संयोग न केवल पारिवारिक संबंधों को मजबूती देगा, बल्कि सामाजिक और प्राकृतिक दृष्टि से भी कल्याणकारी माना जा रहा है। आयुष्मान योग दीर्घायु देता है, सर्वार्थसिद्धि योग सभी कार्यों में सफलता का कारक होता है, और सौभाग्य योग सौंदर्य, ऐश्वर्य व सम्मान को बढ़ाता है। ऐसी शुभ संधि में किया गया कोई भी धार्मिक कार्य विशेष फल देता है।

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