
अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता का पहला दौर समाप्त हो गया है, हालांकि इस वार्ता का कोई ठोस परिणाम अभी सामने नहीं आया है। 47 साल बाद दोनों देशों के बीच आमने-सामने बातचीत हुई है। इससे पहले 1979 की ईरान की इस्लामिक क्रांति के बाद पहली बार दोनों देशों के नेताओं के बीच इस तरह की वार्ता आयोजित हुई है।
प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल
अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जीडी वेंस ने नेतृत्व किया, जबकि ईरान की ओर से संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने प्रतिनिधित्व किया। वहीं पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख आसिम मुनीर, विदेश मंत्री इशाक डार और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार आसिम मलिक शामिल हुए। वार्ता से पहले अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से अलग-अलग मुलाकात भी की।
इस्लामाबाद टॉक के तहत हुआ आयोजन
शांति वार्ता के लिए अमेरिका और ईरान का प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचा, जहां पाकिस्तान ने इस वार्ता को “इस्लामाबाद टॉक” नाम दिया है। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख ने किया।
सोशल मीडिया पर भावनात्मक संदेश
ईरान के स्पीकर गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें विमान की सीटों पर चार बच्चों की तस्वीरें, खून से सने बैग, जूते और फूल रखे गए थे। यह तस्वीर 28 फरवरी को ईरान के मिनाब शहर में हुए स्कूल हमले में मारे गए बच्चों की याद में साझा की गई थी।
इन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा
वार्ता में अमेरिका ने ईरान से परमाणु संवर्धन रोकने, लंबी दूरी की मिसाइलों पर प्रतिबंध लगाने और होर्मूज जलडमरूमध्य को खोलने की मांग रखी है। वहीं ईरान पहले ही अपने 10 सूत्रीय प्रस्ताव प्रस्तुत कर चुका है, जिन पर वह बातचीत करना चाहता है।
अलग-अलग हुई शुरुआती बातचीत
पहले दौर में अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत नहीं हुई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से अलग मुलाकात की, जबकि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने भी पाकिस्तान से अलग वार्ता की।
तनाव के बीच जारी वार्ता
एक ओर जहां इस्लामाबाद में शांति वार्ता जारी है, वहीं दूसरी ओर इजरायल द्वारा लेबनान पर हमले जारी हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव बना हुआ है। वार्ता का अगला दौर 12 अप्रैल को जारी रहने की संभावना है।