
अयोध्या। अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। इस मामले में यह जानकारी सामने आई है कि 5 जून को चढ़ावा गिनती में लगे कर्मचारी अविनाश शुक्ल के घर पर पुलिस और ट्रस्ट के पदाधिकारी पहुंचे थे। उसके घर से नकदी भी मिली थी, लेकिन उस समय न तो एफआईआर दर्ज की गई और न ही अविनाश शुक्ल को उसके दायित्व से हटाया गया। बाद में अविनाश शुक्ल सहित अन्य आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों पर मारे छापे
चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आरोपियों के घर पुलिस ने रविवार को छापेमारी की। इस दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, दस्तावेज एवं अन्य साक्ष्य एकत्र किए गए। आरोपियों के पास से पहले ही 79.85 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं। पुलिस सोमवार को सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश करेगी तथा उनसे पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड की मांग करेगी, ताकि पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा सके।
एफआईआर में अविनाश शुक्ल, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव एवं रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव को नामजद किया गया है।
आभूषण एवं नगदी से जुड़े साक्ष्य जुटाए
चढ़ावा चोरी मामले में आठों आरोपियों के न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जाने के बाद रविवार को छह आरोपियों के सात अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की गई। पुलिस ने आरोपियों के परिजनों से पूछताछ की तथा कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच की। जांच के दौरान प्राप्त दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में जब्त किया गया। पुलिस सोमवार को सभी आठ आरोपियों को विशेष न्यायाधीश के समक्ष पेश करेगी।
शंकराचार्य ने जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एफआईआर दर्ज होने से पहले एसआईटी गठित किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जिन छोटे कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, उनमें इतनी बड़ी रकम के गबन की क्षमता नहीं है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच कराए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।