
भोपाल। जब नेशनल एलिजिबिलिटी कम इन्ट्रेंस टेस्ट ( नीट) प्रवेश परीक्षा के जरिये ही विगत कई वर्षों से मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ़, नईदिल्ली, उत्तरप्रदेश , उत्तराखण्ड समेत देशभर के मेडिकल, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी आयुष कॉलेजों में प्रवेश होते हैं तो अब समय आ गया है कि सभी पैथियों के लिये वन बोर्ड व वन मापदण्ड हों ताकि चिकित्सा क्षेत्र में पारदर्शिता के साथ-साथ समस्त पैथियों का समग्र विकास हो सके। ऐसा कहना है अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन की शाखा मध्यप्रदेश आयुर्वेद सम्मेलन के सदस्य व आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ राकेश पाण्डेय का।
डॉ पाण्डेय ने कहा कि अब मेडिकल बोर्ड एनएमसी, डेंटल बोर्ड डीसीआई, व आयुष बोर्ड एनसीआईएसएम व एनसीएच के स्थान पर वन नेशन – वन मेडिकल बोर्ड स्थापित होने से आधुनिक चिकित्सा पैथी के आगे सभी पैथियों के पिछड़ने पर रोक लग सकेगी और एक ही छत के नीचे सभी का उचित विकास संभव होगा। मापदण्ड भी एक जैसे होंगे तो अध्ययन- अध्यापन व मरीजों की चिकित्सा व्यवस्था में लापरवाही नहीं होगी। फीस व्यवस्था में भी सुधार होगा। वर्तमान में प्रदेश समेत देशभर में 800 से ज्यादा मेडिकल, 300 से ज्यादा डेंटल व 900 से ज्यादा आयुष कॉलेज समेत इन सभी पैथियों के कुल 2000 से ज्यादा कॉलेजों व इन कॉलेजों की 190000 ( एक लाख नब्बे हजार) से ज्यादा सीटों पर प्रतिवर्ष प्रवेश होते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य व आयुष मंत्रालय को वननेशन – वनबोर्ड पर गंभीरता के साथ विचार करना जनहित में होगा।