
छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित बागेश्वर धाम में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर 305 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न कराया गया। इस भव्य आयोजन में देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचे और कार्यक्रम को ऐतिहासिक स्वरूप मिला। सामाजिक समरसता और वैदिक परंपरा के साथ आयोजित इस सामूहिक विवाह समारोह ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।

वैदिक रीति-रिवाज से संपन्न हुआ सामूहिक विवाह
महाशिवरात्रि के शुभ मुहूर्त पर 305 नवविवाहित जोड़ों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सात फेरे लेकर वैवाहिक जीवन की शुरुआत की। आयोजन समिति द्वारा सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं। विवाह समारोह में पारंपरिक विधि-विधान, हवन पूजन और आशीर्वाद कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम के दौरान एक नेपाली जोड़े का भी विवाह संपन्न कराया गया। नेपाल से 50 बाराती आए थे। इस दौरान नेपाली और भारतीय संस्कृति के अनुसार विवाह संस्कार संपन्न कराया गया।
विदेशी राजनयिकों की रही उपस्थिति
इस अवसर पर अनेक देशों के राजदूत भी मौजूद रहे, जिससे आयोजन को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली। उन्होंने भारतीय संस्कृति और सामूहिक विवाह की परंपरा की सराहना करते हुए इसे सामाजिक एकता और सहयोग का उदाहरण बताया।
स्वामी रामभद्राचार्य जी का संबोधन
कार्यक्रम में जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि यह आयोजन भारतीय संस्कृति की महान परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने हंसी-खुशी के वातावरण में कहा कि लगता है कि अगली बार वे धीरेंद्र शास्त्री के विवाह के अवसर पर उपस्थित होंगे। उनके इस वक्तव्य पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने उत्साह व्यक्त किया।
सामाजिक समरसता का संदेश
आयोजकों ने बताया कि सामूहिक विवाह कार्यक्रम का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सहयोग प्रदान करना और समाज में समानता का संदेश देना है। महाशिवरात्रि जैसे पावन पर्व पर आयोजित इस समारोह ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व का भी उदाहरण प्रस्तुत किया।