Jhulelal Temple Jabalpur: चालीसा व्रत से खुलते हैं परमानंद के द्वार- स्वामी अशोकानंद जी

जबलपुर। श्री झूलेलाल मंदिर भरतीपुर में शुक्रवार को आयोजित चालीसा व्रत महोत्सव के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंदिर प्रांगण में आयोजित इस विशेष धार्मिक आयोजन में सिन्धी समाज के सैकड़ों धर्मावलंबियों ने भाग लिया। सिर पर झूलेलाल जी की प्रतिमा बहराणा, दीप, अक्षत, सिंदूर से सजी थालियों के साथ भक्तों ने पारंपरिक थाली पूजा, जल ज्योति पूजा और अक्खा पूजा में हिस्सा लिया।
भक्तों ने पंजड़ा भक्तिगीतों की धुन पर झूमते हुए भगवान झूलेलाल की परिक्रमा की। पुरुषों द्वारा किया गया पारंपरिक चाचर नृत्य और दीपदान अनुष्ठान कार्यक्रम के आकर्षण का केंद्र रहे। सुबह इस विशेष अनुष्ठान की शुरुआत स्वामी प्रदीप महाराज और पंडित वेदांत शर्मा के सान्निध्य में हुई।धर्मसभा को संबोधित करते हुए स्वामी श्री अशोकानंद जी महाराज (महंत, भक्तिधाम ग्वारीघाट) ने कहा कि धर्म ही मनुष्य का सच्चा साथी है, जो परलोक में भी साथ नहीं छोड़ता। जीवन में प्रभु भक्ति, ज्ञान और साधना ही आत्मा की शुद्धि का साधन हैं। उन्होंने कहा कि “जिस प्रकार जल शरीर और वस्त्रों की शुद्धि करता है, उसी प्रकार प्रभु भक्ति आत्मा को शुद्ध करती है।”उन्होंने यह भी कहा कि चालीसा व्रत करने से परमानंद प्राप्ति के द्वार खुल जाते हैं और व्यक्ति आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होता है।

इस भव्य आयोजन में विधायक श्री अशोक रोहाणी सहित अनेक गणमान्यजन शामिल हुए, जिनमें लख्मीचंद खेमानी, गोविन्द हीरानी, प्रकाश आहूजा, प्रकाश आसवानी, राजा सावलानी, राजकुमार कंधारी, कमलेश वासवानी, उमेश बुधरानी, विजय पंजवानी, कैलाश वासवानी, बिल्लू हीरानी, कीर्ति छत्तानी और गोपीचंद्र खत्री प्रमुख रहे।

कार्यक्रम में भक्तों की आस्था, उल्लास और सांस्कृतिक परंपराओं का अनुपम समागम देखने को मिला।

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