इंदौर के भागीरथपुरा में अब तक 14 मौतें: दूषित पानी पी रहे थे लोग, रिपोर्ट में उजागर

इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी की सप्लाई से बड़ा स्वास्थ्य संकट सामने आया है। दूषित पानी पीने से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि सरकारी आंकड़ों में केवल 4 मौतों की पुष्टि की गई है। मेडिकल कॉलेज की जांच रिपोर्ट में भागीरथपुरा में सप्लाई हो रहे पानी को पूरी तरह असुरक्षित बताया गया है।

मेडिकल रिपोर्ट में दूषित पानी की पुष्टि

मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट के अनुसार भागीरथपुरा क्षेत्र में सप्लाई होने वाले पानी में गंदगी पाई गई है। यह पानी न तो पीने योग्य है और न ही घरेलू उपयोग के लिए सुरक्षित बताया गया है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि पानी की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है।

पानी में मिले खतरनाक बैक्टीरिया

जांच के दौरान पानी में ई-कोलाई और शिगेला बैक्टीरिया पाए गए हैं। डॉक्टरों के अनुसार इन बैक्टीरिया से गंभीर संक्रमण होता है और समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

चार मौतें बताई जा रहीं, तो 14 अर्थियां कैसे उठीं?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सरकार दूषित पानी से केवल चार मौतों की बात कर रही है, तो भागीरथपुरा इलाके से 14 लोगों की अर्थियां कैसे उठीं। लोगों का आरोप है कि मौतों का वास्तविक आंकड़ा छिपाया जा रहा है।

सरकार ने स्वयं छह मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए के चेक दिए हैं, जबकि सातवें परिवार ने चेक लेने से इंकार कर दिया।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान

इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

मंत्री के सामने फूटा लोगों का गुस्सा

नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जब मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने पहुंचे, तो महिलाओं ने उनका रास्ता रोक लिया। महिलाओं ने आरोप लगाया कि दो वर्षों से गंदा पानी आने की शिकायत की जा रही थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। पार्षद से कई बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।

क्षेत्रवासियों ने कहा कि अब उन्हें पैसे नहीं, बल्कि जवाब चाहिए। लोगों का आक्रोश देखकर मंत्री विजयवर्गीय को वापस लौटना पड़ा।

उमा भारती ने कसा तीखा तंज

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मामले को लेकर तीखा तंज कसा। उन्होंने लिखा कि इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतें प्रदेश, सरकार और पूरी व्यवस्था के लिए शर्मिंदगी का कारण हैं।

उमा भारती ने कहा कि सबसे स्वच्छ शहर का अवार्ड पाने वाले नगर में इतना जहरीला पानी कई जिंदगियों को निगल गया। जिंदगी की कीमत दो लाख रुपए नहीं होती। इस मामले में दोषियों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए और पीड़ित परिवारों से माफी मांगी जानी चाहिए। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री मोहन यादव के लिए एक परीक्षा की घड़ी बताया।

Back to top button