उद्योगों की समस्याओं पर जल्द फैसले की उम्मीद, फेडरेशन ने एमपीआईडीसी के सामने रखे अहम सुझाव

जबलपुर। मध्यप्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों और उद्यमियों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर फेडरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रतिनिधिमंडल ने भोपाल में एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक चंद्रमौली शुक्ला से मुलाकात की। बैठक में औद्योगिक विकास, प्रक्रियाओं के सरलीकरण और उद्योगों पर पड़ रहे अतिरिक्त वित्तीय भार सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई।

फेडरेशन के अध्यक्ष हिमांशु खरे के नेतृत्व में हुई इस बैठक में एमपीआईडीसी के कार्यकारी निदेशक विशाल चौहान भी मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि प्रदेश में उद्योगों को ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जिसमें नियम स्पष्ट हों और अनुमतियों की प्रक्रिया कम समय में पूरी हो। इससे उद्यमी प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बजाय उत्पादन, निवेश, रोजगार, नवाचार और कारोबार के विस्तार पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।

संपत्ति कर के दोहरे भार का मुद्दा उठाया

बैठक में औद्योगिक क्षेत्रों में संपत्ति कर और संधारण शुल्क के दोहरे वित्तीय भार का विषय प्रमुखता से रखा गया। फेडरेशन ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के रखरखाव के लिए पहले से संधारण शुल्क लिया जाता है। इस राशि से सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट और अन्य सुविधाओं के रखरखाव पर खर्च किया जाता है।

ऐसे में संधारण शुल्क और नगर निकायों की ओर से लगाए जाने वाले संपत्ति कर के बीच समन्वय कर उद्योगों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक भार को कम करने की जरूरत बताई गई।

नक्शा मंजूरी के लिए सिंगल विंडो की मांग

औद्योगिक भवनों के नक्शों की स्वीकृति प्रक्रिया को लेकर भी फेडरेशन ने सुझाव दिए। प्रतिनिधिमंडल ने औद्योगिक क्षेत्रों में निर्माण संबंधी अनुमतियों के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था लागू करने की मांग की।

इसके साथ ही 30 दिन की समय-सीमा तय करने और निर्धारित अवधि में निर्णय नहीं होने पर ऑनलाइन डिम्ड अप्रूवल की व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया गया। फेडरेशन का मानना है कि इससे उद्योगों की स्थापना और विस्तार में होने वाली देरी कम होगी तथा निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।

निवेश और रोजगार को मिलेगा फायदा

फेडरेशन अध्यक्ष हिमांशु खरे ने कहा कि उद्योगों से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल और समयबद्ध बनाने से प्रदेश में नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही मौजूदा इकाइयों के विस्तार, रोजगार के अवसरों और एमएसएमई सेक्टर के विकास को भी गति मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि फेडरेशन उद्योग जगत की समस्याओं को शासन के समक्ष लगातार उठाता रहेगा और नीतिगत सुधारों के लिए सरकार के साथ संवाद जारी रखेगा। उद्देश्य मध्यप्रदेश को निवेश, विनिर्माण, व्यापार और एमएसएमई के क्षेत्र में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है।

शासन स्तर पर मामले विचाराधीन

एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक चंद्रमौली शुक्ला ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि उद्योग एवं व्यापार से संबंधित कई समस्याएं शासन स्तर पर विचाराधीन हैं। उन्होंने कहा कि इन विषयों पर जल्द उचित कार्रवाई किए जाने की संभावना है, जिससे उद्यमियों को राहत मिल सके।

प्रतिनिधिमंडल में ये पदाधिकारी रहे मौजूद

प्रतिनिधिमंडल में फेडरेशन के उपाध्यक्ष जयदेव ताम्रकार, सी.बी. मालपानी, अशोक आनंद, राजीव जैन, सचिव प्रवीण आचार्य, सहसचिव डॉ. सुरेंद्र सिंह और राजेश हिरवे सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

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