
विशाखापत्तनम में डीआरडीओ की प्रमुख प्रयोगशाला – नौसेना विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला (एनएसटीएल) में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 03 अप्रैल को आंध्र प्रदेश के अत्याधुनिक ‘लार्ज कैविटेशन टनल’ (एलसीटी) सुविधा की आधारशिला रखी। यह सुविधा भारत की नौसेना अनुसंधान और परीक्षण क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि करेगी, जो तकनीकी आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में बड़ा कदम है।
स्वदेशी डिजाइन और परीक्षण क्षमताओं को मिलेगा बढ़ावा
रक्षा मंत्री ने एनएसटीएल में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और कर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस पहल के साथ, भारत अपने स्वयं के संसाधनों का उपयोग करके अपने उपकरणों, प्रणालियों और उप-प्रणालियों को स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और परीक्षण करने में सक्षम होगा। इससे वह खुद को मजबूत नौसेना शक्ति और रक्षा प्रौद्योगिकी में अग्रणी राष्ट्र के रूप में स्थापित कर सकेगा। उन्होंने कहा, “अब तक, उपकरणों, प्रणालियों और उप-प्रणालियों को सफलतापूर्वक विकसित करने के बाद भी, हमें अक्सर महत्वपूर्ण परीक्षणों के लिए विदेशों की ओर देखना पड़ता था।
अब यह स्थिति बदल जाएगी। यह सुविधा केवल बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं है, बल्कि सक्षम प्रणाली है, जो प्रणोदन प्रणालियों (propulsion systems) को आगे बढ़ाने में हमारी क्षमताओं को मजबूत करेगी, शोर कम करने पर केंद्रित प्रयासों को सक्षम बनाएगी और हमारी ‘स्टेल्थ’ (stealth) क्षमताओं को और सुदृढ़ करेगी। यह पनडुब्बियों और जहाजों के डिजाइन और विकास के लिए मूलभूत आधार के रूप में कार्य करेगी, जो नौसेना इंजीनियरिंग और समुद्री रक्षा प्रणालियों में भविष्य की प्रगति को समर्थन प्रदान करेगी।”
आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूती
रक्षा मंत्री ने इस परियोजना को ‘आत्मनिर्भर भारत’ के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प की सफलता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने का सरकार का दृढ़ संकल्प, राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र से गहराई से जुड़ा हुआ है; और चुनौतियों के बावजूद, देश ने घरेलू उद्योग, शिक्षा जगत, एमएसएमई, युवाओं और शोधकर्ताओं के एकजुट प्रयासों के कारण विभिन्न क्षेत्रों में पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल की है।
डीआरडीओ ने परियोजनाओं की दी जानकारी
इस दौरान, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने रक्षा मंत्री को एनएसटीएल की परियोजनाओं/कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी।
उन्नत नौसैनिक प्रणालियों का प्रदर्शन
श्री राजनाथ सिंह ने ‘सीकीपिंग एंड मैन्यूवरिंग बेसिन’ का भी दौरा किया, जहाँ उन्होंने पानी के नीचे काम करने वाले उन्नत सिस्टम्स का प्रभावशाली प्रदर्शन देखा। इन प्रणालियों में टॉरपीडो, नौसैनिक माइंस, डिकॉय और ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल्स (एयूवी) शामिल हैं।
स्पिन-ऑफ तकनीकों से विकसित उत्पादों का निरीक्षण
रक्षा मंत्री ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद ‘नेवल सिस्टम्स मैटेरियल्स क्लस्टर लैब्स’ द्वारा स्पिन-ऑफ तकनीकों के रूप में विकसित किए गए कुछ महत्वपूर्ण उत्पादों का भी निरीक्षण किया।
एनएसटीएल के अनुसंधान कार्यों की सराहना
राजनाथ सिंह ने एनएसटीएल की सराहना करते हुए कहा कि उसने टॉरपीडो सिस्टम, पानी के नीचे की माइंस, डिकॉय और एयूवी सहित कई क्षेत्रों में अनुसंधान किया है और नए मानक स्थापित किए हैं। इससे भारत शक्तिशाली नौसैनिक शक्ति बनने की राह पर आगे बढ़ रहा है।
इस अवसर पर प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ) जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, पूर्वी नौसेना कमान वाइस एडमिरल संजय भल्ला और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।