पन्‍ना के कुआंताल का मां कंकाली मंदिर: अद्भुत लेटी हुई प्रतिमा और सैकड़ों साल पुराना है इतिहास

पन्ना। बुंदेलखंड के पन्ना जिले की पवई विधानसभा अंतर्गत ग्राम बनौली कुआं ताल स्थित मां कंकाली मंदिर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत केंद्र है। शारदीय और चैत्र नवरात्रि दोनों ही अवसरों पर यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर मां के दर्शन करते हैं। नौ दिनों तक यहां भारी भीड़ रहती है और भक्त धर्म लाभ प्राप्त करते हैं।

सैया पर विराजमान माता की विलक्षण प्रतिमा

मां कंकाली की प्रतिमा अपने आप में अद्वितीय है। देवी महाकाली के स्वरूप में माता यहां सैया पर लेटी हुई हैं और बालक को स्तनपान कराती दिखाई देती हैं। वहीं दासी उनके चरणों से कांटे निकाल रही हैं। ज्यादातर मंदिरों में माता को बैठे हुए या शेर पर सवार रूप में देखा जाता है, लेकिन यह स्वरूप अद्भुत और दुर्लभ है। प्रतिमा चांदी के वस्त्रों से सुसज्जित रहती है।

तालाब से मिली थी प्रतिमा

मंदिर के इतिहास के अनुसार, सैकड़ों वर्ष पहले बनौली गांव के राय बंधु को माता ने सपने में दर्शन दिए थे। इसके बाद उन्हें पास के गांव के तालाब से माता की प्रतिमा मिली। राय बंधु ने प्रतिमा को अपने भैंसे पर रखा और घर की ओर बढ़े, लेकिन जहां आज मंदिर बना है, वहां भैंसा रुक गया और फिर उठाया नहीं जा सका। इसी स्थान पर प्रतिमा की स्थापना की गई और भव्य मंदिर का निर्माण हुआ।

श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं होती हैं पूर्ण

कहा जाता है कि मां कंकाली के दरबार में आने वाले हर भक्त की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मंदिर के चमत्कारों की अनेक कथाएं प्रसिद्ध हैं। एक घटना के अनुसार, मंदिर के पास के तालाब में डूबे हुए व्यक्ति को दो घंटे बाद भी जीवित निकाला गया। वहीं एक भक्त ने अपनी जुबान माता को अर्पित कर दी थी, लेकिन माता की कृपा से वह स्वस्थ हो गया। कोरोना काल में भी कई लोग माता के आशीर्वाद से सुरक्षित रहे।

मंदिर का जीर्णोद्धार और भव्य स्वरूप

वर्तमान में पवई विधायक प्रहलाद सिंह लोधी ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया है। मंदिर का निर्माण दक्षिण भारतीय शैली की कलाकृति में किया गया है। यहां हजारों श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था के लिए सामुदायिक भवन बनाए गए हैं और आयोजनों के लिए आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

नवरात्रि मेला और आयोजन

चैत्र नवरात्रि पर यहां विशाल मेला आयोजित होता है, जो संपूर्ण बुंदेलखंड में प्रसिद्ध है। यह मेला लगभग एक माह तक चलता है। इसमें आसपास के जिलों के साथ ही अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु और व्यापारी शामिल होते हैं। यहां सामूहिक विवाह सम्मेलनों सहित कई सामाजिक और धार्मिक आयोजन भी किए जाते हैं।

रिपोर्ट: राकेश कुमार शर्मा

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