हीरों की नगरी पन्ना में मां पद्मावती का दिव्य दरबार, जहां पूरी होती हैं हर मुरादें

राकेश कुमार शर्मा

पन्ना। हीरों और मंदिरों की नगरी के रूप में प्रसिद्ध पन्ना जिले में स्थित मां पद्मावती शक्तिपीठ श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि यहां मां भगवती के दरबार में जो भी सच्चे मन से अपनी मनोकामना लेकर आता है, उसकी इच्छा अवश्य पूर्ण होती है। चैत्र नवरात्रि के दौरान यहां पूरे नौ दिनों तक भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालु सुबह 5 बजे से ही मंदिर पहुंचकर माता रानी के दर्शन करते हैं और पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

शक्तिपीठ का इतिहास और धार्मिक मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां सती के शरीर के अंग पृथ्वी के विभिन्न स्थानों पर गिरे थे, जहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई। पन्ना में मां सती का दाहिना पैर (पद) गिरा था। इसी कारण इस पवित्र स्थान को पद्मावती शक्तिपीठ कहा जाता है और यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है।

प्राचीन मंदिर और नाम की उत्पत्ति

कहा जाता है कि प्राचीन काल में इस क्षेत्र में पद्मावत नाम के एक राजा हुए थे, जो शक्ति के महान उपासक थे। उन्होंने अपनी आराध्य देवी मां दुर्गा को पद्मावती नाम से यहां स्थापित किया। इसी कारण इस स्थान का नाम पद्मावतीपुरी पड़ा, जो समय के साथ परिवर्तित होकर पन्ना हो गया।

किलकिला नदी के तट पर स्थित है मंदिर

मां पद्मावती शक्तिपीठ का मंदिर किलकिला नदी के समीप स्थित है। स्थानीय भाषा में इस मंदिर को “बड़ी देवन” के नाम से भी जाना जाता है। नवरात्रि के दौरान यहां भव्य धार्मिक आयोजन होते हैं और देशभर से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस दौरान बुंदेली भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।

मां सती की कथा से जुड़ा है शक्तिपीठ का महत्व

पौराणिक कथा के अनुसार मां सती भगवान शिव की पत्नी और राजा दक्ष की पुत्री थीं। जब राजा दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन किया और उसमें भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया, तो इससे आहत होकर मां सती ने यज्ञ अग्नि में देह त्याग दी। यह देख भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो गए और मां सती के शरीर को लेकर ब्रह्मांड में विचरण करने लगे। तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से मां सती के शरीर के टुकड़े किए, जिससे विभिन्न शक्तिपीठों की स्थापना हुई।

पन्ना-मैहर-पबई का चमत्कारिक धार्मिक त्रिकोण

पद्मावती शक्तिपीठ, मैहर स्थित मां शारदा मंदिर और पबई का कालिका माता मंदिर मिलकर एक विशेष धार्मिक त्रिकोण बनाते हैं। पन्ना से पबई की दूरी लगभग 45 किलोमीटर है, वहीं पबई से मैहर की दूरी भी लगभग 45 किलोमीटर है और मैहर से पन्ना की दूरी भी लगभग समान है। इस त्रिकोण को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत चमत्कारिक माना जाता है।

गंगा-जमुनी संस्कृति की अनूठी मिसाल

मां पद्मावती शक्तिपीठ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां सभी धर्मों और समुदायों के लोग श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं। मुस्लिम समाज के लोग भी यहां मन्नत मांगने आते हैं, जो सामाजिक सद्भाव और गंगा-जमुनी संस्कृति की अनूठी मिसाल प्रस्तुत करता है।

आस्था, इतिहास और संस्कृति का संगम

मां पद्मावती शक्तिपीठ केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और संस्कृति का अद्भुत संगम है। यहां आने वाला हर श्रद्धालु मां के दर्शन कर आत्मिक शांति और आशीर्वाद का अनुभव करता है।

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