सिवनी के जंबो सीताफल, बुरहानपुर के केले सहित मध्यप्रदेश की नौ कृषि उपजों को मिला जीआई टैग

भोपाल। मध्यप्रदेश के सिवनी जिले का जंबो सीताफल, बुरहानपुर का केला और इंदौर का मालवी आलू सहित प्रदेश की नौ कृषि उपजों को जीआई (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) टैग प्रदान किया गया है। इससे इन कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान मिलेगी। जीआई टैग मिलने से इन उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना है। साथ ही किसानों को बेहतर मूल्य, नए बाजार और निर्यात के अधिक अवसर प्राप्त होंगे।

जीआई टैग किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में उत्पादित वस्तु की विशिष्ट पहचान का प्रमाण होता है। जिस उत्पाद को जीआई टैग मिलता है, उसके नाम से नकली उत्पाद बेचना कानूनन अपराध माना जाता है। इससे स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता और पहचान सुरक्षित रहती है।

इन कृषि उपजों को मिला जीआई टैग

सिवनी – जंबो सीताफल
बुरहानपुर – केला
इंदौर – मालवी आलू
रतलाम – गराडू एवं बालम ककड़ी
डिंडौरी – सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी, बैगानी अरहर एवं छत्रिय धान

सामान्य सीताफल से बड़ा होता है जंबो सीताफल

सिवनी का जंबो सीताफल सामान्य सीताफल की तुलना में आकार में बड़ा होता है। यह फल प्राकृतिक रूप से बिना रासायनिक खाद के उगाया जाता है। इसके विशिष्ट स्वाद और गुणवत्ता को देखते हुए वर्ष 2023 में इसे जीआई टैग के लिए आवेदन किया गया था।

बुरहानपुर का केला बना विशेष पहचान

बुरहानपुर का केला अपनी विशिष्ट गुणवत्ता और उत्पादन के लिए जाना जाता है। प्रदेश की इकलौती केला मंडी भी बुरहानपुर में स्थित है। यहां प्रतिवर्ष लगभग 18 लाख 28 हजार मीट्रिक टन केले का उत्पादन होता है, जिससे यह क्षेत्र देश के प्रमुख केला उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है।

रतलाम ने बनाया नया रिकॉर्ड

रतलाम की बालम ककड़ी और गराडू को जीआई टैग मिलने के बाद जिले के जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की संख्या चार हो गई है। प्रदेश के किसी अन्य जिले में इतने उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त नहीं हुआ है। इससे पहले रतलाम के सेव और रियावन सिल्वर लहसुन को भी जीआई टैग मिल चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग मिलने से इन कृषि उत्पादों की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी, किसानों की आय में वृद्धि होगी तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में मध्यप्रदेश के कृषि उत्पादों की नई पहचान स्थापित होगी।

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