
कोयले पर टैक्स से बचत के बाद भी महंगी बिजली का प्रस्ताव
जबलपुर। कोयले पर सरचार्ज कम होने के बाद भी मप्र में बिजली कंपनियों ने बिजली दाम बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। बिजली कम्पनियों ने 6044 करोड़ रुपये का घाटा बताकर 10.19 प्रतिशत औसत दाम बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है। मप्र विद्युत नियामक आयोग इस प्रस्ताव पर आम लोगों से सुझाव और आपत्ति मांग रहा है।
1500 करोड़ की बचत के बावजूद दर बढ़ोतरी का प्रस्ताव
बिजली मामलों के जानकारों का दावा है कि कोयले पर सेज या सरचार्ज को केंद्र सरकार ने खत्म कर दिया है। जिस वजह से बिजली कंपनियों को करीब 1500 करोड़ रुपये सालाना राजस्व की बचत होगी। ऐसे में बिजली के दाम बढ़ाने का प्रस्ताव न्याय संगत नहीं है।
कोयले पर सेज खत्म, कीमत में आई कमी
एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल ने बताया कि कोयले पर लगने वाला कम्पनसेशन सेज या सरचार्ज जो 400 रुपये प्रति टन कोयले पर लगता था, वह 22 सितंबर 2025 से भारत सरकार ने खत्म कर दिया है। इसके अलावा जीएसटी के रेट कोयले पर पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत किया गया है।
इस बदलाव से लगभग 250 रुपये प्रति टन कोयले की कीमत में कमी आई है। ऊर्जा मंत्री ने पूर्व में दिए बयान में दावा किया था कि इससे आम उपभोक्ता को कम दर पर बिजली मिलेगी। बिजली के जानकार इस छूट से करीब 25 पैसे प्रति यूनिट दाम कम होने का अनुमान जाहिर कर रहे थे।
नए प्रस्ताव में छूट को किया नजरअंदाज
मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी के नवीन वार्षिक राजस्व आवश्यकता प्रस्ताव 2026-27 में इस बचत को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए 10.19 प्रतिशत बिजली दर की बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया गया है। सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य अभियंता एवं एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि कोयले के जीएसटी में बदलाव से बिजली कंपनी को लगभग 1500 करोड़ रुपये सालाना राजस्व बचेगा।
उन्होंने बताया कि बिजली कंपनी द्वारा एनटीपीसी, जेनको और निजी ताप विद्युत गृहों से खरीदी गई बिजली में लगभग सात करोड़ टन कोयले की सालाना खपत होती है।
पेश कर सकते हैं दावे और आपत्ति
मप्र विद्युत नियामक आयोग ने बिजली कंपनी के प्रस्ताव को स्वीकार्य किया है। अब आयोग जनता से इस मामले पर सुझाव और आपत्ति मांगने जा रहा है। बिजली वितरण कंपनियों के मुख्यालयों में अलग-अलग तारीखों को जनसुनवाई आयोजित की गई है।
पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मुख्यालय जबलपुर में जनसुनवाई 24 फरवरी, पश्चिम क्षेत्र में 25 फरवरी और मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी भोपाल में 26 फरवरी को जनसुनवाई तय की गई है। आयोग ने जनसुनवाई से पहले 25 जनवरी तक आपत्ति और सुझाव मांगे हैं।
12 साल पुराना घाटा बताया जा रहा
बिजली मामलों के जानकार एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि टैरिफ वृद्धि गलत है। उनके अनुसार बिजली कंपनी ने घाटे के लिए जो 6044 करोड़ की राशि याचिका में दर्शाई है, वह 12 साल पुरानी है, जिसे आयोग पूर्व में खारिज कर चुका है।
150 यूनिट से अधिक खपत पर ज्यादा असर
बिजली के दाम बढ़ाने का प्रस्ताव घरेलू उपभोक्ताओं पर अधिक असर डालेगा। प्रदेश में घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 129 लाख है। घरेलू श्रेणी में 150 यूनिट से अधिक मासिक खपत करने वाले उपभोक्ताओं पर प्रति यूनिट 51 पैसे का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
अभी प्रस्तावित बढ़ोतरी (पैसे में)
- 50 यूनिट तक – 445 से 478 (33 पैसे)
- 51 से 150 यूनिट – 541 से 582 (41 पैसे)
- 151 से 300 यूनिट – 679 से 730 (51 पैसे)
- 300 यूनिट से ऊपर – 698 से 730 (32 पैसे)