
नोबल शांति पुरस्कार 2025 की घोषणा हो चुकी है। इस घोषणा से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सपना टूट गया है। इस वर्ष का नोबल शांति पुरस्कार मारिया कोरिना मचाडो को मिला है। वे वेनजुएला में विपक्ष की नेता हैं। उन्होंने वेनजुऐला में लोकतंत्र के लिए काफी संघर्ष किया है। वे काफी समय से लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही हैं। मारिया ने वेनजुएला के निवासियों को एकजुट किया और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उनके इसी संघर्ष को देखते हुए उन्हें नोबल शांति पुरस्कार 2025 देने की घोषणा की गई।
मारिया कोरिना मचाडो ने 2011 से 2014 तक वेनजुएला की राष्ट्रीय सभा की निर्वाचित सदस्य के रूप में काम किया है। टाइम मैग्नीज ने 2025 में मारिया को 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल किया था। मचाडो ने सुमाते नामक संगठन की स्थापना की है। वे देश में निष्पक्ष और मुफ्त चुनावों की मांग करती रही हैं। मारिया कोरिना मचाडो का जन्म कराकास वेनजुएला में हुआ था। वे इंजीनियर हैं और विपक्ष की नेता हैं। वे 2024 में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार थीं। लेकिन उनकी उम्मीदवारी रद्द हो गई।
ट्रंप नोबल पुरस्कार के लिए समय-समय पर दावेदारी करते रहे। इसके लिए वे विभिन्न मंचों का इस्तेमाल करके यह दावा किया कि उन्होंने कई देशों के युद्ध को समाप्त करवाया।