Rath Yatra in Jabalpur: प्रजा का हाल जानने रथ पर निकले भगवान जगन्नाथ

भक्तों ने रथ खींचकर लगाए जयकारे, जगह-जगह की गई पुष्प वर्षा, रथ खींचने उमड़े श्रद्धालु

जबलपुर। भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा जबलपुर में बड़े ही श्रद्धा और धूमधाम से निकाली गई। नगर के बड़े फुहारा क्षेत्र में  11 रथों का एक साथ भव्य स्वागत किया गया और पांच महाआरतियों के साथ दिव्य आरती की गई। इस दौरान संतों ने स्वर्णमयी (सोने की) झाड़ू से मार्ग बुहार कर परंपरा का निर्वहन किया, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

संतों ने किया रथयात्रा का नेतृत्‍व

रथयात्रा का नेतृत्व नरसिंह पीठाधीश्वर जगद्गुरु नरसिंह दास महाराज, दंडी स्वामी प्यारेनंद महाराज, महामंडलेश्वर अखिलेश्वरानंद गिरी महाराज, महामंडलेश्वर राधेचैतन्य महाराज, स्वामी पगलानंद महाराज, स्वामी मुकुंद दास महाराज, स्वामी चंद्रशेखरानंद महाराज, पंडित रोहित दुबे, योगी राजेश दास महाराज, पंडित वासुदेव शास्त्री और पंडित संतोष शास्त्री ने किया।

रथयात्रा में जगदीश मंदिर, गड़ाफाटक, साहू समाज हनुमानताल, बंगाली क्लब, विट्ठल रघुराई मंदिर सहित कई मंदिरों के रथ शामिल हुए। बैंड-बाजे, दुलदुल घोड़ी, आकर्षक झांकियां और भजन मंडलियों के साथ यह शोभायात्रा नगरवासियों को भक्ति और सांस्कृतिक रंग में रंगती नजर आई।

जबलपुर में निकाली गई भगवान जगन्‍नाथ की रथ यात्रा में बड़ी संख्‍या में श्रद्धालु शामिल हुए।
जबलपुर में निकाली गई भगवान जगन्‍नाथ की रथ यात्रा में बड़ी संख्‍या में श्रद्धालु शामिल हुए।

भक्‍तों को किया प्रसाद वितरण

इस अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रसाद वितरण का आयोजन भी किया गया। स्वागत समिति के शरद अग्रवाल के नेतृत्व में खिचड़ी का महाभोग और मीठा भात भक्तों को वितरित किया गया। आयोजन में नर्मदा महाआरती ग्वारीघाट के संस्थापक और स्वागत समिति के अध्यक्ष डॉ. सुधीर अग्रवाल सहित राजेंद्र सराफ, मुकेश साहू, हरीश साहू, विनोद दीवान, श्याम मनोहर पटेल, शोभाराम गोटिया, मनोज नामदेव आदि उपस्थित रहे।

जबलपुर में निकाली गई भगवान जगन्‍नाथ की रथ यात्रा में बड़ी संख्‍या में श्रद्धालु शामिल हुए।
जबलपुर में निकाली गई भगवान जगन्‍नाथ की रथ यात्रा में बड़ी संख्‍या में श्रद्धालु शामिल हुए।

रथयात्रा ने शहर के श्रद्धालुओं को भगवान जगन्नाथ के दिव्य स्वरूप के दर्शन और परंपराओं में भागीदारी का अनूठा अवसर प्रदान किया। आयोजन ने नगर की धार्मिक-सांस्कृतिक एकता को और मजबूत किया और समाज में भक्ति व समर्पण की भावना का संचार किया।

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