
जबलपुर। धार्मिक नगरी जबलपुर के गढ़ा स्थित प्राचीन संकट मोचन हनुमान मंदिर में शनिवार को एक दुर्लभ और ऐतिहासिक आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला, जब भगवान सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पावन अवशेष संकट मोचन हनुमान जी के दरबार पहुंचे। इस अवसर पर भक्तों ने जहां एक ओर सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के अवशेषों का विधिवत रुद्राभिषेक किया, वहीं संकट मोचन हनुमान जी की विधि-विधान से पूजा कर सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ किया गया।
आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा आयोजित हुआ भव्य रुद्र पूजन
यह पावन आयोजन आर्ट ऑफ लिविंग के तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन शामिल हुए। पूरे मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, रुद्र सूक्त और भक्ति भाव का वातावरण बना रहा। भक्तों ने इसे अपने जीवन का सौभाग्यशाली क्षण बताया, जब उन्हें सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के मूल स्वरूप से जुड़े अवशेषों के साक्षात दर्शन प्राप्त हुए।
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग से जुड़े ऐतिहासिक तथ्य बताए
रुद्र पूजन के दौरान आर्ट ऑफ लिविंग के संत शिवतेष जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के अवशेषों से जुड़ी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि सतयुग में चंद्र देव द्वारा स्थापित सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को भारत का प्रथम ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह ज्योतिर्लिंग भूमि से लगभग तीन फीट ऊंचाई पर स्थित था और इसके निर्माण में प्रयुक्त पत्थर इस पृथ्वी पर उपलब्ध धातुओं से भिन्न था।
महमूद गजनवी के आक्रमण और ज्योतिर्लिंग की रक्षा की कथा
संत शिव तेज जी ने बताया कि सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर आक्रमणकारी महमूद गजनी ने कुल 17 बार आक्रमण किए और 18वीं बार में ज्योतिर्लिंग को खंडित कर दिया। इस संकट की घड़ी में मंदिर के पुजारियों ने अद्भुत साहस दिखाते हुए ज्योतिर्लिंग के मूल स्वरूप को सुरक्षित निकाल लिया। इसके बाद लगभग एक हजार वर्षों तक गुप्त रूप से इन अवशेषों की पूजा-अर्चना की जाती रही।
शंकराचार्य की भविष्यवाणी और 100 वर्षों की गुप्त पूजा
संत ने आगे बताया कि वर्ष 1924 में कांची पीठ के शंकराचार्य चंद्रशेखर सरस्वती जी ने भविष्यवाणी की थी कि देश की स्वतंत्रता के बाद और राम मंदिर निर्माण पूर्ण होने के उपरांत, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के मूल स्वरूप को संत शंकर को सौंपा जाएगा। इसके पूर्व 100 वर्षों तक गुप्त पूजा का विधान रहेगा। वर्ष 2025 में यह अवधि पूर्ण होने के साथ ही शंकराचार्य की यह भविष्यवाणी सत्य सिद्ध हुई।
देशभर में दर्शन कराने निकली आध्यात्मिक यात्रा
बताया गया कि कुंभ प्रारंभ होने से पहले पुजारी परिवार की अंतिम पीढ़ी के सीतारमन शास्त्री ने 11 एकादश शिवलिंग गुरुदेव श्रीश्री रविशंकर जी को सौंपे। कुंभ के दौरान संतों के परामर्श से यह निर्णय लिया गया कि इन अवशेषों के दर्शन देशभर के श्रद्धालुओं को कराए जाएं। इसी क्रम में अलग-अलग क्षेत्रों में यात्राएं संचालित की जा रही हैं।
भक्तों में दिखा उत्साह और श्रद्धा
संकट मोचन हनुमान मंदिर में आयोजित इस आयोजन में श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही। भक्तों ने सोमनाथ ज्योतिर्लिंग और संकट मोचन हनुमान जी के एक साथ दर्शन को दुर्लभ संयोग बताते हुए इसे अपने जीवन का पुण्य अवसर माना।