
जबलपुर। संस्कार कांवड़ यात्रा के मद्देनजर सोमवार 10 अगस्त 2026 को नगर निगम क्षेत्र में संचालित सभी शासकीय एवं अशासकीय स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह के निर्देशानुसार जिला शिक्षा अधिकारी ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।
10 अगस्त को स्कूलों में रहेगा अवकाश
जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश के अनुसार सोमवार 10 अगस्त को जबलपुर नगर निगम क्षेत्र में संचालित सभी शासकीय एवं अशासकीय स्कूलों में अवकाश रहेगा। संस्कार कांवड़ यात्रा के आयोजन को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
ग्वारीघाट से कैलाशधाम मटामर तक होती है यात्रा
संस्कार कांवड़ यात्रा जबलपुर के ग्वारीघाट स्थित नर्मदा तट से शुरू होकर कैलाशधाम मटामर तक जाती है। नर्मदा मिशन के अनुसार यात्रा की दूरी लगभग 35 किलोमीटर है। इसमें कांवड़िये मां नर्मदा का पवित्र जल लेकर पैदल यात्रा करते हैं।
नर्मदा जल से भगवान शिव का अभिषेक
यात्रा के दौरान कांवड़िये मां नर्मदा का जल लेकर कैलाशधाम पहुंचते हैं। वहां भगवान नर्मदेश्वर भोलेनाथ का नर्मदा जल से अभिषेक किया जाता है। संस्कार कांवड़ यात्रा का धार्मिक आधार भगवान शिव की आराधना और नर्मदा जल के प्रति आस्था से जुड़ा है।
कांवड़ में नर्मदा जल के साथ देववृक्ष
संस्कार कांवड़ यात्रा की प्रमुख विशेषताओं में नर्मदा जल के साथ देववृक्ष को कांवड़ में शामिल करना है। नर्मदा मिशन के अनुसार कांवड़िये एक ओर मां नर्मदा का जल और दूसरी ओर देववृक्ष लेकर यात्रा करते हैं।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश
यात्रा में देववृक्षों को शामिल करने का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना है। यात्रा के दौरान पौधों के महत्व और उनके संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया जाता है। कैलाशधाम पहुंचने के बाद देववृक्षों के रोपण और उनके संरक्षण का संकल्प भी इस पहल का हिस्सा है।
जल और वृक्ष संरक्षण पर जोर
संस्कार कांवड़ यात्रा के माध्यम से नर्मदा नदी के संरक्षण और वृक्षों के महत्व का संदेश दिया जाता है। नर्मदा जल को भगवान शिव को अर्पित करने के साथ देववृक्षों के रोपण की परंपरा धार्मिक आस्था को प्रकृति संरक्षण से जोड़ती है।
‘रन फॉर नेचर’ से जुड़ी है यात्रा
नर्मदा मिशन संस्कार कांवड़ यात्रा को ‘रन फॉर नेचर’ की अवधारणा से जोड़ता है। इसका उद्देश्य धार्मिक आयोजन के साथ प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
आस्था और पर्यावरण संरक्षण का संगम
संस्कार कांवड़ यात्रा में भगवान शिव की आराधना, मां नर्मदा के प्रति श्रद्धा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश एक साथ दिखाई देता है। नर्मदा जल से भगवान शिव के अभिषेक के साथ देववृक्षों के रोपण और संरक्षण की पहल इस यात्रा की विशिष्ट पहचान है।