
रवीन्द्र सुहाने
जबलपुर। भगवान शिव के प्राचीन और विश्वप्रसिद्ध सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दुर्लभ एवं दिव्य अवशेष पहले 27 और फिर 30 दिसंबर को जबलपुर पहुंचेंगे। इस अवसर पर शहर में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, भजन एवं सत्संग का आयोजन किया जाएगा। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग से जुड़ी मान्यताएं
आर्ट ऑफ लिविंग की स्टेट कोऑर्डिनेटर मनीषा लुम्बा ने बताया कि मान्यता के अनुसार यह वही दिव्य ज्योतिर्लिंग है, जिसकी स्थापना सतयुग में भगवान चंद्रदेव द्वारा की गई थी। इसे प्रथम ज्योतिर्लिंग माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यह शिवलिंग भूमि को स्पर्श नहीं करता था और हवा में स्थित रहता था, जो इसे अत्यंत अद्भुत और दिव्य बनाता है।

इतिहास और संरक्षण की कहानी
उन्होंने बताया कि वर्ष 1026 में महमूद गजनवी के आक्रमण के दौरान यह ज्योतिर्लिंग खंडित हो गया था। इसके बाद एक अग्निहोत्री ब्राह्मण परिवार इसके अवशेषों को दक्षिण भारत ले गया और पीढ़ियों तक इन्हें गुप्त रूप से सुरक्षित रखा। वर्ष 1924 में कांचीपीठ के आठवें शंकराचार्य चंद्रशेखर सरस्वती जी ने इन अवशेषों को सौ वर्षों तक गुप्त रखने के निर्देश दिए थे। सौ वर्ष पूर्ण होने के बाद शास्त्री परिवार ने कुंभ से पहले ये अवशेष गुरुदेव श्रीश्री रविशंकर जी को सौंपे।

देशभर में दर्शन यात्रा
मनीषा लुम्बा ने कहा कि गुरुदेव श्रीश्री रविशंकर जी के आशीर्वाद से अब इन दिव्य अवशेषों को देशभर में यात्रा के माध्यम से श्रद्धालुओं के दर्शन कराए जा रहे हैं। आमतौर पर श्रद्धालु ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए जाते हैं, लेकिन इस बार स्वयं ज्योतिर्लिंग भक्तों के बीच आए हैं।
वैज्ञानिक जांच में भी प्रमाणित
उन्होंने बताया कि इन अवशेषों की वैज्ञानिक जांच भी कराई गई है। भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण की वर्ष 2007 की रिपोर्ट के अनुसार शिवलिंग के पत्थरों में 120 से 140 गॉस तक का प्रबल चुंबकीय क्षेत्र पाया गया है। तत्वीय विश्लेषण में बेरियम, सिलिकॉन, मैग्नीशियम, सल्फर और आयरन जैसे तत्व मौजूद पाए गए हैं। मद्रास जेम इंस्टीट्यूट, चेन्नई की रिपोर्ट ने भी इनमें मजबूत चुंबकीय गुणों की पुष्टि की है।
पहले भी हुआ ऐतिहासिक मिलन
इसके पूर्व विश्वप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकाल के धाम उज्जैन में सोमनाथ के पुरातात्विक अवशेषों से बने दिव्य शिवलिंगों का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक मिलन हो चुका है। यह शिवलिंग मध्यप्रदेश के लगभग 35 जिलों में भ्रमण करेंगे। 14 दिसंबर को उज्जैन से यात्रा की शुरुआत हुई है।
27 दिसंबर: गौरीघाट में रुद्राभिषेक
आर्ट ऑफ लिविंग के शिक्षक नवीन बरसैंया ने बताया कि 27 दिसंबर को डिंडौरी की ओर से शिवलिंग का जबलपुर में प्रवेश होगा। इसी दिन शाम 5 बजे सिद्धगणेश मंदिर गौरीघाट से उमाघाट तक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। शाम 6 बजे उमाघाट में रुद्राभिषेक होगा तथा शाम 7 बजे से श्रद्धालुओं को दर्शन का लाभ मिलेगा। इसके पश्चात यात्रा रीवा की ओर प्रस्थान करेगी।
30 दिसंबर और 1 जनवरी का कार्यक्रम
उन्होंने बताया कि विभिन्न जिलों की यात्रा के बाद 30 दिसंबर को शिवलिंग शहडोल की ओर से पुनः जबलपुर पहुंचेंगे। शाम 6 बजे मदन महल शारदा मंदिर के समीप स्थित आर्ट ऑफ लिविंग के ज्ञान क्षेत्र (टीओके) में रुद्राभिषेक होगा। शाम 7 बजे से दर्शन प्रारंभ होंगे। इसी दौरान प्रसिद्ध कलाकार गौतम डबीर जी का विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।
एक जनवरी को 2026 अहिंसा चौक से कचनार क्लब तक शोभायात्रा निकाली जाएगी। शाम 6 बजे कचनार क्लब में रुद्राभिषेक होगा और शाम 7 बजे से श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर मिलेगा। इसके बाद यात्रा दमोह जिले के हटा के लिए प्रस्थान करेगी, जहां भी रुद्राभिषेक का आयोजन किया जाएगा।
फोटो: आर्ट ऑफ लिविंग