
जबलपुर/रीवा। नवरात्रि पर्व का उत्साह इन दिनों विंध्य, महाकोशल और बुंदेलखंड अंचल में चरम पर है। देवी दुर्गा की साधना और आराधना का यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। गली-चौराहों पर बने भव्य पंडाल, मंदिरों में हो रहे विशेष पूजन-अर्चन और आयोजनों में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ इस उत्सव को और भी भव्य बना रही है।
रीवा जिले के सरई गांव में माता काली प्रतिमा का आगमन
रीवा जिले के ग्राम सरई में नवदुर्गा उत्सव समिति एवं मिश्रा परिवार द्वारा नवरात्रि महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। खास बात यह रही कि यहां माता काली जी की प्रतिमा जबलपुर संस्कारधानी से लाई गई। प्रतिमा के गांव पहुंचने पर पूरे क्षेत्र में उल्लास और आस्था का वातावरण बन गया।
ग्रामीणों ने मिलकर माता जी की पूजा-अर्चना की और महाआरती में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित किया। इस आयोजन से ग्रामवासियों की श्रद्धा और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला।
पूज्य नारायण स्वामी जी का सानिध्य
यह धार्मिक आयोजन पूज्य नारायण स्वामी जी के सानिध्य में संपन्न हो रहा है। स्वामी जी के आशीर्वचन और आध्यात्मिक मार्गदर्शन से श्रद्धालुओं का उत्साह और भी बढ़ गया है। नवरात्रि के अवसर पर मां काली की आराधना और हवन-पूजन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा है।
महाआरती में रही बड़ी उपस्थिति
आज के महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। बुद्धसेन मिश्रा, उग्रसेन मिश्रा, बृजकिशोर मिश्रा, प्रभुनाथ मिश्रा, संदीप मिश्रा, अशोक मिश्रा, हरिनाथ मिश्रा, प्रियांशु मिश्रा, अंकित मिश्रा, शिवम मिश्रा, रोहित मिश्रा, विनय पांडेय और प्रमोद पांडेय सहित अनेक सामाजिक बंधु उपस्थित रहे। इस आयोजन में समाज के हर वर्ग के लोग आस्था से जुड़े नजर आए।
अंचलों में नवरात्रि की एक झलक
विंध्य, महाकोशल और बुंदेलखंड क्षेत्रों में नवरात्रि महोत्सव की भव्यता अलग ही छवि प्रस्तुत कर रही है। जबलपुर, रीवा, सतना, दमोह, छतरपुर और आसपास के जिलों में दुर्गा पंडालों की रौनक देखते ही बन रही है। देवी प्रतिमाओं का श्रृंगार, आकर्षक झांकियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम इस पर्व को विशेष बना रहे हैं। जबलपुर के टेमर भीटा में जवारों की भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
धर्म और संस्कृति का संगम
नवरात्रि केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है बल्कि यह सामाजिक मेलजोल और संस्कृति के संरक्षण का पर्व भी है। परिवार, समाज और संगठन मिलकर इस उत्सव को भव्यता प्रदान करते हैं। रीवा के सरई गांव से लेकर जबलपुर और पूरे बुंदेलखंड तक, मां दुर्गा की भक्ति और परंपराओं की दिव्यता ने इस नवरात्रि को अविस्मरणीय बना दिया है।