
जबलपुर। संगठित और असंगठित क्षेत्र के वेतनभोगी श्रमिकों एवं कार्मिकों के वेतन, कार्य समय, बीमा और पेंशन का निर्धारण किया जाना चाहिए। यह मांग इंडियन नेशनल सैलरी एम्पलाइज एवं प्रोफेशनल वर्कर्स फेडरेशन की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में उठाई गई। बैठक में मुख्य अतिथि श्रम कानून विशेषज्ञ एवं पूर्व वरिष्ठ अधिकारी अजय मिश्रा तथा विशिष्ट अतिथि फेडरेशन के राष्ट्रीय सचिव राकेश डी.पी. पाठक उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के प्रदेश अध्यक्ष विजय सिंह रघुवंशी ने की।
इंडियन नेशनल सैलरी एम्पलाइज एवं प्रोफेशनल वर्कर्स फेडरेशन के महामंत्री रामराज तिवारी ने बैठक में एजेंडा प्रस्तुत करते हुए संबंधित विषयों की जानकारी दी। इसके बाद प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कमेटी के पदाधिकारियों ने एजेंडे का एकमत से समर्थन किया।
नए श्रम कानूनों और कर्मचारियों के अधिकारों पर चर्चा
फेडरेशन की बैठक में मुख्य अतिथि अजय मिश्रा ने बताया कि भारत सरकार ने 29 पुराने केंद्रीय श्रम कानूनों को समाहित करते हुए चार श्रम संहिताएं लागू की हैं। केंद्र सरकार की आधिकारिक घोषणा के अनुसार, ये चार श्रम संहिताएं 21 नवंबर 2025 से प्रभावी की गईं। इनमें वेतन संहिता, 2019; औद्योगिक संबंध संहिता, 2020; सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता, 2020 शामिल हैं।
अजय मिश्रा ने कहा कि इन कानूनों में कर्मचारियों और श्रमिकों के हितों से जुड़े प्रावधान हैं। उन्होंने वेतनभोगी कर्मचारी की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी कंपनी या संस्था में मासिक वेतन पर काम करने वाले कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र अनिवार्य रूप से दिया जाना चाहिए। चाहे कर्मचारी निजी क्षेत्र में कार्यरत हो या सरकारी संस्थान में, अथवा एनसीएल, एनटीपीसी, अडानी, बीएचईएल और बिजली कंपनियों में कार्य करता हो, उसे नियुक्ति और वेतन संबंधी नियमों की स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।
उन्होंने वेतन भुगतान की समय-सीमा का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्मचारियों को समय पर वेतन मिलना आवश्यक है। वेतन संहिता, 2019 की धारा 17 में मासिक वेतन का भुगतान अगले महीने की सातवीं तारीख की समय-सीमा के भीतर करने का प्रावधान है।
आउटसोर्स कर्मचारियों की स्थिति पर जताई चिंता
फेडरेशन के राष्ट्रीय सचिव राकेश डी.पी. पाठक ने कहा कि आज देश के अनेक सरकारी विभागों, कंपनियों और निजी संस्थानों का काम संविदा एवं आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है। उन्होंने मध्य प्रदेश की बिजली कंपनियों का उल्लेख करते हुए कहा कि नियमित कर्मचारियों की संख्या में बड़ी कमी आई है और बिजली उत्पादन, पारेषण, वितरण, प्रशासनिक कार्य तथा उपभोक्ता सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण कार्य संविदा एवं आउटसोर्स कर्मचारियों के माध्यम से कराए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि संगठित और असंगठित क्षेत्र में कार्यरत महिला एवं पुरुष कर्मचारियों को कई स्थानों पर नियुक्ति पत्र, केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन, समय पर वेतन, निर्धारित कार्य समय, साप्ताहिक अवकाश, पेंशन, ग्रेच्युटी, बीमा, चिकित्सा बीमा और कार्यस्थल पर सुरक्षा जैसी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने इसे गंभीर स्थिति बताते हुए राज्य शासन और बिजली कंपनियों के प्रबंधन से इन विषयों पर विशेष ध्यान देने तथा आवश्यक प्रावधान सुनिश्चित करने की मांग की। उनके अनुसार, इससे कर्मचारियों के आर्थिक, मानसिक और शारीरिक शोषण को रोकने में मदद मिलेगी।
वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए
संगठन के महामंत्री रामराज तिवारी ने ईटीसी के 50 प्रतिशत वेतन से संबंधित विषय उठाया और कहा कि इस व्यवस्था पर विचार होना चाहिए, ताकि पीएफ और ग्रेच्युटी के मामले में कर्मचारियों को नुकसान न हो।
रीवा से आए इंटक के प्रदेश संगठन सचिव जी.पी. त्रिपाठी ने कहा कि नेशनल सैलरी एम्पलाइज एवं प्रोफेशनल वर्कर्स फेडरेशन के सदस्यों को लोकतांत्रिक तरीके से अपने हितों के संवर्धन के लिए कार्य करना चाहिए।
महिला कर्मचारियों के उत्थान पर भी जोर
सिंगरौली से आईं राष्ट्रीय महिला इंटक की पदाधिकारी एवं एनसीएल की पूर्व महाप्रबंधक (कार्मिक) सुमन लता डेहरिया ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि पावर सेक्टर और कोल माइंस की ओर से उन्हें नागपुर एवं बेंगलुरु भेजा गया था, जहां महिलाओं को जागरूक करने और उनके हितों के लिए कार्य करने का प्रशिक्षण मिला। उन्होंने बताया कि बेंगलुरु में महिलाओं के उत्थान के लिए परियोजना तैयार करने का निर्देश मिला था। उनके अनुसार, राष्ट्रीय महिला ग्लोबल सम्मेलन में मध्य प्रदेश को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ।
संगठन की सदस्यता बढ़ाने का आह्वान
फेडरेशन इंटक के प्रदेश उपाध्यक्ष नरेंद्र मिश्रा ने प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक का संचालन करते हुए श्रमिकों से संबंधित नियमों और कानूनों की जानकारी दी। उन्होंने जिला, संभाग और प्रदेश स्तर से आए पदाधिकारियों से फेडरेशन की सदस्यता बढ़ाने तथा कर्मचारियों के हितों के संवर्धन के लिए सक्रिय रूप से कार्य करने का आग्रह किया।
फेडरेशन के प्रदेश उपाध्यक्ष राहुल त्रिपाठी ने संगठन का विस्तार करने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। यूथ इंटक के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं बीएचईएल के महामंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी संगठन में अधिक से अधिक सदस्यों को जोड़ने का आह्वान किया और अंत में आभार व्यक्त किया।
बैठक में प्रदेश अध्यक्ष विजय सिंह रघुवंशी, नरेंद्र मिश्रा, रामराज तिवारी, राहुल त्रिपाठी, जी.पी. त्रिपाठी, अजय मिश्रा, राकेश डी.पी. पाठक, सुमन लता डेहरिया, मिथिलेश तिवारी, एन.के. यादव, कमलेश सिंह, रंजन सिंह, उमाशंकर मेहता, आर.के. हर्ट, पवन मिश्रा, सुमित कुमार, उमेश पांडे, अफसार अहमद सहित अनेक पदाधिकारियों ने कर्मचारियों के हितों से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में मिथिलेश तिवारी ने आभार व्यक्त किया।