
राकेश कुमार शर्मा
पन्ना। जंगल और गांवों में सर्पदंश से होने वाली मौतों को रोकने के लिए दक्षिण पन्ना वनमंडल अब घटनाओं के पीछे छिपे कारणों की पड़ताल कर रहा है। वनमंडल के सभी छह परिक्षेत्रों में पिछले पांच-छह वर्षों की गंभीर और घातक सर्पदंश घटनाओं का वैज्ञानिक सर्वे शुरू किया गया है।
वन विभाग यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि सर्पदंश के सबसे अधिक मामले किन गांवों में, किन महीनों में और दिन के किस समय सामने आते हैं। इसके साथ ही घटनाओं से जुड़ी परिस्थितियों का भी अध्ययन किया जा रहा है, ताकि अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर रोकथाम के उपायों को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके।
दंश के समय व्यक्ति क्या कर रहा था, यह भी दर्ज
सर्वे में केवल सर्पदंश की घटना की जानकारी ही दर्ज नहीं की जा रही है, बल्कि घटना के समय की परिस्थितियों को भी अध्ययन का हिस्सा बनाया गया है। इसमें यह जानकारी जुटाई जा रही है कि दंश के समय व्यक्ति क्या कर रहा था, उसने जूते या टॉर्च का उपयोग किया था या नहीं और सांप ने शरीर के किस हिस्से पर काटा।
घटना के बाद उपचार मिलने में कितना समय लगा, इसकी जानकारी भी जुटाई जा रही है। इस तरह वन विभाग सर्पदंश की घटनाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं को एक साथ दर्ज कर रहा है, ताकि बाद में आंकड़ों के आधार पर कारणों और जोखिम वाले क्षेत्रों का विश्लेषण किया जा सके।
मौत और उपचार से बचने वाले मामलों की तुलना
सर्वे की एक महत्वपूर्ण कड़ी सर्पदंश के बाद हुई मौतों और उपचार के बाद बचने वाले लोगों के मामलों की तुलना भी है। दोनों तरह की घटनाओं में दंश का समय, परिस्थितियां, उपचार तक पहुंचने में लगा समय और अन्य उपलब्ध जानकारी को देखा जा रहा है।
इस तुलना के माध्यम से विभाग यह समझने का प्रयास कर रहा है कि किन परिस्थितियों में सर्पदंश के बाद जोखिम अधिक रहा और किन मामलों में समय पर उपचार मिलने से व्यक्ति की जान बच सकी।
छह परिक्षेत्रों में पहुंच रही टीमें
दक्षिण पन्ना वनमंडल के रैपुरा, शाहनगर, सलेहा, कल्दा, मोहन्द्रा और पवई परिक्षेत्र में वनकर्मियों को सर्वे की जिम्मेदारी दी गई है। टीमें प्रभावित क्षेत्रों और परिवारों से सर्पदंश की घटनाओं से संबंधित जानकारी जुटा रही हैं।
सलेहा क्षेत्र में करीब 40 गांवों का सर्वे पूरा किया जा चुका है। वहीं अन्य क्षेत्रों में भी प्रभावित परिवारों से जानकारी एकत्र करने का काम जारी है।
एंटीवेनम केंद्र की दूरी और उपचार तक पहुंच भी अध्ययन में
सर्पदंश की घटना के बाद उपचार तक पहुंचने में लगने वाले समय को समझने के लिए सर्वे में एंटीवेनम केंद्र की दूरी, परिवहन की उपलब्धता और उपचार तक पहुंचने के समय की जानकारी भी जुटाई जा रही है। इन पहलुओं को सर्पदंश से होने वाली मौतों के कारणों के अध्ययन में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आंकड़ों से चिन्हित होंगे सर्पदंश हॉटस्पॉट
सर्वे से जुटाए जा रहे आंकड़ों के आधार पर सर्पदंश के हॉटस्पॉट और अधिक जोखिम वाले गांवों की पहचान की जाएगी। इससे विभाग को यह तय करने में मदद मिल सकेगी कि किन क्षेत्रों में रोकथाम और जागरूकता गतिविधियों को प्राथमिकता देने की जरूरत है।
हॉटस्पॉट की पहचान के बाद टॉर्च वितरण, जागरूकता अभियान और बचाव गतिविधियों को जरूरत वाले क्षेत्रों पर केंद्रित किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य लोगों को सर्पदंश से बचाव के प्रति जागरूक करना और जोखिम वाले क्षेत्रों में आवश्यक सावधानियों को बढ़ावा देना है।
समय पर सावधानी और उपचार पर जोर
वन विभाग का मानना है कि सर्पदंश की घटनाओं में समय पर सावधानी और शीघ्र उपचार महत्वपूर्ण है। सर्वे के माध्यम से सामने आने वाले आंकड़े भविष्य में सर्पदंश की रोकथाम और प्रभावित क्षेत्रों में जागरूकता गतिविधियों की दिशा तय करने में उपयोगी हो सकते हैं।