
पीले वस्त्रों में श्रद्धालुओं ने किया पूजन
गणेश छठ के अवसर पर मंदिर परिसर का वातावरण भक्तिमय रहा। महिलाओं और पुरुषों ने पीले वस्त्र धारण कर भगवान श्री गणेश का पूजन, वंदन और अभिनंदन किया। आयोजन के दौरान मंदिर में पारंपरिक छठ एवं जच्चा-बच्चा पूजन जैसा उत्सवी माहौल दिखाई दिया।
पारंपरिक वाद्य यंत्रों पर गूंजे भक्ति भजन
कार्यक्रम में उपस्थित महिला मंडली ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों पर विभिन्न भजनों की प्रस्तुतियां दीं। भजनों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया और श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए।
गणेशजी को झुलाया पालना, अर्पित किए खिलौने और उपहार
श्रद्धालु बालगोपाल स्वरूप भगवान श्री गणेश के लिए विभिन्न प्रकार के उपहार, मिष्ठान और खिलौने लेकर पहुंचे। महिलाओं और अन्य श्रद्धालुओं ने गजानन को श्रद्धाभाव से पालने में झुलाया। इसके बाद आरती कर क्षेत्र और समाज के कल्याण की कामना की गई।
महंत प्रमोद महाराज की साधना का किया उल्लेख
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. रवि राय ने अपने संबोधन में मंदिर के महंत स्वामी प्रमोद महाराज के तपस्वी जीवन और साधना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महाराज बाल्यावस्था से ही साधना और प्रभु भक्ति में लीन रहे हैं। डॉ. राय ने उनके जीवन में कठोर तपश्चर्या और साधना के विभिन्न प्रसंगों का भी उल्लेख किया तथा उन्हें सिद्धियों का स्वामी बताया।
‘जय श्री रजत गणेश’ कहने का लिया संकल्प
इस अवसर पर डॉ. रवि राय ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि सनातन संस्कृति और दैनिक जीवन में पारंपरिक अभिवादन को बढ़ावा देने के लिए ‘गुड मॉर्निंग’ जैसे पाश्चात्य अभिवादनों के स्थान पर ‘जय श्री रजत गणेश’ कहने का संकल्प लिया जाए। उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए दैनिक जीवन में ‘जय श्री रजत गणेश’ के उद्घोष का संकल्प लिया।
महंत प्रमोद महाराज ने बताया सेवा को प्रथम कर्तव्य
महंत प्रमोद महाराज ने अपने संदेश में कहा कि महंत होने का अर्थ प्राप्त सिद्धियों का उपयोग भक्तों के कल्याण के लिए करना है। उन्होंने कहा कि भक्तों के कष्टों का निवारण करना तथा ईश्वर की आराधना और सेवा करना प्रथम कर्तव्य है।
सुरेश शारदा ने किया कार्यक्रम का संचालन
गणेश छठ के इस धार्मिक आयोजन का संचालन सुरेश शारदा ने किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का वातावरण बना रहा।