
इंदौर में 125 से अधिक व्यापारिक संगठनों का समर्थन
इंदौर में 125 से अधिक व्यापारिक संगठनों ने ‘नो UPI डे’ के समर्थन की बात कही है। रिपोर्टों के अनुसार, इंदौर में बड़ी संख्या में व्यापारी इस अभियान में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। विरोध के प्रतीक के तौर पर कुछ व्यापारियों ने QR कोड स्कैनर और पेमेंट डिवाइस को काले कपड़े से ढकने की भी तैयारी की है।
₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर MDR प्रस्ताव
विरोध का मुख्य मुद्दा ₹2,000 से अधिक के पात्र Person-to-Merchant (P2M) UPI लेन-देन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत MDR है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, नया MDR ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से लागू किया जाना है।
व्यापारियों का कहना, बढ़ सकती है कारोबार की लागत
व्यापारी संगठनों का तर्क है कि डिजिटल भुगतान अब कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। ऐसे में उच्च मूल्य वाले UPI लेन-देन पर अतिरिक्त शुल्क लगने से व्यापारियों की लागत बढ़ सकती है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि छोटे मार्जिन पर काम करने वाले कारोबारियों के लिए यह अतिरिक्त लागत चिंता का विषय है।
ग्राहकों से सीधे नहीं लिया जाएगा MDR
प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण बात यह है कि MDR ग्राहक से सीधे वसूला जाने वाला UPI शुल्क नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह पात्र मर्चेंट लेन-देन से जुड़ा शुल्क है, जिसका प्रभाव व्यापारी पक्ष पर पड़ता है। ₹2,000 तक के लेन-देन और व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) भुगतान को इस प्रस्तावित MDR के दायरे से बाहर बताया गया है।
‘नो UPI डे’ के जरिए विरोध दर्ज कराने की तैयारी
व्यापारी संगठन 23 सितंबर के ‘नो UPI डे’ के जरिए प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था पर अपनी आपत्ति दर्ज कराने की तैयारी में हैं। अभियान को मध्य प्रदेश के अन्य शहरों तक पहुंचाने के लिए व्यापारिक संगठनों के नेटवर्क और डिजिटल माध्यमों से संपर्क किए जाने की भी रिपोर्ट है।
डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर बहस तेज
UPI MDR को लेकर एक ओर व्यापारी संगठन अतिरिक्त लागत की चिंता जता रहे हैं, वहीं नई व्यवस्था के समर्थकों की ओर से इसे डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने की दिशा में बदलाव बताया जा रहा है। ऐसे में 23 सितंबर का ‘नो UPI डे’ प्रस्तावित MDR व्यवस्था को लेकर व्यापारिक समुदाय की आपत्तियों को सामने लाने का माध्यम बन रहा है।