बिरसिंहपुर में 1300 करोड़ की ग्रीन एनर्जी परियोजना, 39 से ज्यादा कंपनियों ने दिखाई दिलचस्पी

जबलपुर। उमरिया के बिरसिंहपुर स्थित संजय गांधी ताप विद्युत गृह के कूलिंग रिजर्वायर को अब सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए भी इस्तेमाल करने की तैयारी है। यहां 200 मेगावाट क्षमता का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगाने की प्रस्तावित परियोजना को लेकर नई दिल्ली में निवेशक संवाद आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ऊर्जा क्षेत्र की 39 से अधिक कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

मध्यप्रदेश भवन में हुए इस संवाद में टाटा पावर, वारी एनर्जी, एनटीपीसी ग्रीन, भेल, एनएचपीसी और सेरेनटिका सहित कई प्रमुख कंपनियों ने परियोजना में रुचि दिखाई। लगभग 1300 करोड़ रुपये की इस परियोजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी PPP मॉडल के माध्यम से विकसित किया जाना है। वर्तमान में परियोजना निविदा प्रक्रिया में है।

200 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर प्लांट

प्रस्ताव के अनुसार कूलिंग रिजर्वायर की सतह पर ग्रिड से जुड़ा 200 मेगावाट का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया जाएगा। परियोजना में निर्धारित सौर क्षमता में 10 प्रतिशत तक बदलाव की गुंजाइश रखी गई है। इसके साथ ही 50 मेगावाट क्षमता और 100 मेगावाट घंटे की क्षमता वाला बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम भी स्थापित किया जाएगा।

विशेषज्ञ सलाहकार की भूमिका में MPPGCL

मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) परियोजना के लिए विशेषज्ञ और ट्रांजैक्शन सलाहकार के तौर पर सहयोग कर रही है। कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने निवेशकों के समक्ष परियोजना की तकनीकी योजना, निवेश व्यवस्था और इसे जमीन पर उतारने की प्रक्रिया की जानकारी दी।

अधीक्षण अभियंता अवनीश शुक्ला ने परियोजना की तकनीकी जानकारी प्रस्तुत की। वहीं नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे ने प्रदेश में अक्षय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में उपलब्ध निवेश अवसरों पर चर्चा की।

बिना नई जमीन के विकसित होगी परियोजना

फ्लोटिंग सोलर परियोजना में मौजूदा कूलिंग रिजर्वायर का उपयोग किया जाना इसकी प्रमुख विशेषता है। इससे नई जमीन की जरूरत और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया से बचा जा सकेगा। साथ ही पहले से उपलब्ध जल एवं विद्युत ढांचे का उपयोग परियोजना के लिए किया जाएगा।

तकनीकी और वित्तीय पहलुओं पर हुई चर्चा

निवेशक संवाद के दौरान कंपनियों और अन्य हितधारकों ने परियोजना से जुड़े तकनीकी, वित्तीय और क्रियान्वयन संबंधी पहलुओं पर सवाल और सुझाव रखे। अधिकारियों ने विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी साझा की। परियोजना के जरिए सौर ऊर्जा उत्पादन के साथ बैटरी भंडारण को जोड़कर प्रदेश में स्वच्छ और भरोसेमंद ऊर्जा व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है।