ग्राम फुलर भीटा में भागवत कथा के तृतीय दिवस ध्रुव चरित का भावपूर्ण वर्णन

कथा व्यास डॉ. स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज ने सुनाया ध्रुव चरित्र, भक्ति और दृढ़ संकल्प का दिया संदेश

जबलपुर। ग्राम फुलर भीटा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस कथा व्यास श्रीमद् जगतगुरु नृसिंह पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज ने भगवान श्रीहरि की भक्ति, ध्रुव चरित्र एवं भक्त के दृढ़ संकल्प का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भक्ति और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

माता के वचनों को हृदय में धारण कर वन गए ध्रुव

कथा व्यास जी महाराज ने ध्रुव चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि राजा उत्तानपाद के पुत्र ध्रुव को अपनी सौतेली माता के कठोर वचनों से अत्यंत पीड़ा हुई। बालक ध्रुव ने अपनी माता सुनीति के पास जाकर अपनी व्यथा कही। माता ने उन्हें संसार के सहारे के बजाय भगवान श्रीहरि की शरण में जाने की प्रेरणा दी।

माता के वचनों को हृदय में धारण कर बालक ध्रुव वन की ओर निकल पड़े। मार्ग में देवर्षि नारद जी ने उन्हें भगवान की भक्ति का मार्ग बताया और मंत्र प्रदान कर साधना के लिए प्रेरित किया। बालक ध्रुव ने अटूट श्रद्धा और दृढ़ संकल्प के साथ भगवान श्रीहरि का ध्यान किया।

ध्रुव की तपस्या से प्रसन्न होकर प्रकट हुए भगवान विष्णु

ध्रुव की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु स्वयं उनके समक्ष प्रकट हुए। भगवान के दिव्य दर्शन पाकर ध्रुव भाव-विभोर हो गए। भगवान ने उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया और आगे चलकर ध्रुव को अटल ध्रुव पद प्राप्त हुआ। कथा व्यास जी ने कहा कि ध्रुव की कथा हमें सिखाती है कि उम्र छोटी हो सकती है, लेकिन यदि संकल्प दृढ़ हो और मन में भगवान के प्रति अटूट विश्वास हो तो असंभव कार्य भी संभव हो जाता है।

प्रह्लाद चरित्र और भक्ति की महिमा का वर्णन

कथा में प्रह्लाद चरित्र एवं भगवान की भक्ति की महिमा, भक्त और भगवान के संबंध तथा सत्संग के महत्व का भी सुंदर वर्णन किया गया। महाराज जी ने कहा कि मनुष्य को जीवन में सुख-दुःख, मान-अपमान और विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान का स्मरण नहीं छोड़ना चाहिए। सच्ची भक्ति वही है जिसमें परिस्थितियां कैसी भी हों, भक्त का विश्वास भगवान पर अडिग रहे।

भजनों और जयकारों से भक्तिमय हुआ कथा पंडाल

कथा के दौरान भजनों एवं भगवान के जयकारों से पूरा कथा पंडाल भक्तिमय हो उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर धर्म, भक्ति और सदाचार का संदेश ग्रहण किया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने ध्रुव चरित्र के प्रसंग से प्रेरणा लेते हुए भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा और विश्वास को और अधिक दृढ़ करने का संकल्प लिया।

मुख्य यजमान ने किया व्यास पीठ का पूजन

कथा के मुख्य यजमान सुरेंद्र सिंह ने व्यास पीठ का पूजन किया। इस अवसर पर राम सिंह, वीरेन्द्र सिंह, ओमकार सिंह, दशरथ सिंह, सत्यनारायण सिंह, हिम्मत सिंह, रामकिशोर सिंह, पृथ्वीराज सिंह, घनश्याम सिंह, सुखराम सिंह, रमेश सिंह, मुन्ना सिंह, भगवान सिंह, शैलेन्द्र सिंह एवं अनिरुद्ध सिंह की उपस्थिति रही।

रिपोर्ट: विध्‍येश भापकर