दीपावली 2026: आठ नवंबर को होगा लक्ष्मी पूजन, जानें धनतेरस से भाई दूज तक के शुभ मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य ने धर्मसिंधु ग्रंथ के आधार पर बताया पूजन का निर्णय, 6 नवंबर को धनतेरस से शुरू होगा पर्व

जबलपुर। दीपावली का महापर्व इस बार विशेष संयोग के साथ मनाया जाएगा। सामान्य तौर पर पांच दिवसीय माने जाने वाले दीपोत्सव का आयोजन इस बार छह दिनों तक होगा। 6 नवंबर को धनतेरस से दीप पर्व का शुभारंभ होगा और 11 नवंबर को भाई दूज के साथ महोत्सव का समापन होगा। दीपावली पर महालक्ष्मी पूजन की तिथि को लेकर ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे ने धर्मसिंधु एवं श्री व्रतराज ग्रंथ के आधार पर अपना मत बताया है।

अमावस्या की प्रदोष व्यापिनी तिथि में होता है लक्ष्मी पूजन

धार्मिक मान्यता के अनुसार जिस दिन सूर्यास्त के बाद एक घड़ी से अधिक समय तक अमावस्या तिथि रहती है, उसी दिन दीपावली मनाई जाती है। मान्यता है कि कार्तिक अमावस्या की रात्रि में माता लक्ष्मी धरती पर विचरण करती हैं। इसी कारण अमावस्या की रात को महालक्ष्मी पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे ने धर्मसिंधु ग्रंथ का उल्लेख करते हुए बताया कि यदि अमावस्या प्रदोष व्यापिनी हो तो उसी दिन महालक्ष्मी पूजन, संध्या दीपदान और महाकाली पूजन करना चाहिए तथा अगले दिन अभ्यंग स्नान करना चाहिए। अमावस्या तिथि प्रदोष व्यापिनी होने के साथ साढ़े तीन प्रहर से अधिक प्राप्त हो तो उसी दिन चतुर्दशी युक्त अमावस्या में दीपावली पूजन किया जाता है।

श्री व्रतराज ग्रंथ में भी प्रदोष काल में पूजन का उल्लेख

पंडित सौरभ दुबे के अनुसार श्री व्रतराज ग्रंथ में कहा गया है-

“ततः प्रदोषसमये पूजये दिन्दिराम शुभाम।”

अर्थात प्रदोष काल में शुभ लक्ष्मी पूजन करना चाहिए। कार्तिक कृष्ण अमावस्या को प्रदोष काल में दीपावली मनाने तथा इस दिन दीपदान और लक्ष्मी पूजन करने का विधान बताया गया है।

उन्होंने धर्मसिंधु ग्रंथ के वचन- “पूर्वत्रैव प्रदोषव्याप्तौ लक्ष्मीपूजनादौ पूर्वा अभ्यंगस्नानादौ परा” का उल्लेख करते हुए बताया कि इसी आधार पर रविवार, 8 नवंबर 2026 को दीपावली मनाने का निर्णय किया गया है। उनके अनुसार किसी पर्व की तिथि को लेकर संशय होने पर धर्मसिंधु ग्रंथ के निर्णय को प्रधानता दी जाती है।

धनतेरस से भाई दूज तक छह दिन का महोत्सव

दीपोत्सव के दौरान अलग-अलग तिथियों पर धार्मिक आयोजन होंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार पर्वों का क्रम इस प्रकार रहेगा-

  • 6 नवंबर: धन त्रयोदशी यानी धनतेरस
  • 7 नवंबर: नरक चौदस
  • 8 नवंबर: दीपावली एवं महालक्ष्मी पूजन
  • 9 नवंबर: श्राद्ध अमावस्या
  • 10 नवंबर: गोवर्धन पूजन एवं अन्नकूट
  • 11 नवंबर: भाई दूज

धनतेरस पर खरीदारी के शुभ मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे के अनुसार शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को धनतेरस के अवसर पर हस्त नक्षत्र और कन्या राशि के संयोग में खरीदारी के लिए निम्न शुभ समय बताए गए हैं-

  • प्रातः 9:10 बजे से 10:40 बजे तक
  • दोपहर 12:12 बजे से 1:44 बजे तक
  • शाम 4:21 बजे से रात 8:57 बजे तक

मेष एवं वृषभ लग्न का समय दोपहर 4:28 बजे से रात 8:07 बजे तक बताया गया है।

इस तरह धनतेरस से भाई दूज तक छह दिनों तक दीपोत्सव की रौनक रहेगी। घरों और प्रतिष्ठानों में दीप प्रज्ज्वलन, लक्ष्मी-गणेश पूजन, दीपदान और विभिन्न धार्मिक परंपराओं के साथ पर्व मनाया जाएगा।