नरक चौदस है खास, 7 नवंबर को नरक चतुर्दशी तो 8 को होगा अभ्यंग स्नान

पंडित सौरभ दुबे के अनुसार 7 नवंबर को होगा यमदीप दान, 8 नवंबर को सुबह 5:43 से 6:51 बजे तक अभ्यंग स्नान का मुहूर्त

जबलपुर। दीपावली पर्व के पांच दिवसीय आयोजन में नरक चतुर्दशी यानी रूप चौदस का विशेष धार्मिक महत्व है। इस वर्ष 7 नवंबर, शनिवार को नरक चतुर्दशी, रूप चौदस और यमदीप दान किया जाएगा, जबकि अभ्यंग स्नान 8 नवंबर, रविवार को होगा। तिथियों के इस विशेष संयोग को लेकर श्रद्धालुओं में उत्सुकता है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर 2026 को सुबह 10:51 बजे प्रारंभ होगी और 8 नवंबर को सुबह 10:49 बजे समाप्त होगी। धार्मिक परंपराओं के अनुसार नरक चतुर्दशी, रूप चौदस और यमदीप दान 7 नवंबर को किया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन यमराज की पूजा और दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है तथा घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

दक्षिण दिशा में जलाएं यम दीपक

नरक चतुर्दशी की पूजा में यम दीपक जलाने का विशेष महत्व है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यह दीपक दक्षिण दिशा की ओर जलाना चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना जाता है। चौमुखी मिट्टी का दीपक इसके लिए शुभ माना गया है। इसमें सरसों का तेल डालकर चार बत्तियां लगाई जाती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यमदीप दान करने से परिवार पर आने वाले संकटों से रक्षा होती है।

भगवान श्रीकृष्ण ने किया था नरकासुर का वध

पौराणिक कथाओं के अनुसार, राक्षस नरकासुर ने अपने अत्याचारों से तीनों लोकों में आतंक मचा रखा था। उसके अत्याचारों से देवता और मनुष्य परेशान थे। कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर 16 हजार कन्याओं को उसके बंधन से मुक्त कराया था।

इसी घटना की स्मृति में नरक चतुर्दशी या रूप चौदस मनाई जाती है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है।

8 नवंबर को होगा अभ्यंग स्नान

ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे के अनुसार, नरक चतुर्दशी के अवसर पर अभ्यंग स्नान का विशेष महत्व है। इस वर्ष अभ्यंग स्नान 8 नवंबर, रविवार को किया जाएगा। धार्मिक परंपरा में सूर्योदय से पहले तेल लगाकर स्नान करने का विधान है। आयुर्वेद में भी अभ्यंग यानी तेल मालिश को शरीर की देखभाल और मानसिक शांति से जोड़कर देखा जाता है।

स्नान के दौरान अपामार्ग (चिचड़ा) से संबंधित मंत्र का जाप करने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे पापों और नकारात्मकता से मुक्ति की कामना की जाती है।

अभ्यंग स्नान मंत्र:

सितालोष्ठसमायुक्तं सकण्टकदलान्वितम्।
हर पापमपामार्ग भ्राम्यमाण: पुन: पुन:॥

अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त

दिनांक: रविवार, 8 नवंबर 2026

समय: सुबह 5:43 बजे से 6:51 बजे तक

पंडित सौरभ दुबे के अनुसार, श्रद्धालु निर्धारित मुहूर्त में अभ्यंग स्नान कर धार्मिक परंपराओं का पालन कर सकते हैं। नरक चतुर्दशी का पर्व दीपदान, पूजा-अर्चना और स्नान के माध्यम से जीवन में सुख, आरोग्य और समृद्धि की कामना का संदेश देता है।