Bargi Dam Video: 35 साल में पहली बार जुलाई के पहले सप्ताह में एक साथ खुले बांध के 9 गेट

रवीन्‍द सुहाने

जबलपुर। मध्यप्रदेश में लगातार झमाझम बारिश का असर अब नर्मदा नदी के बरगी बांध पर भी साफ नजर आने लगा है। 6 जुलाई 2025 को पहली बार ऐसा हुआ जब जुलाई के पहले ही सप्ताह में बरगी बांध के जल स्तर में असाधारण तेजी से वृद्धि के कारण सीधे एक साथ 9 गेट खोलने पड़े। बाढ़ नियंत्रण कक्ष रानी अवंति बाई लोधी सागर परियोजना के प्रभारी आरआर रोहित ने बताया कि ऐसा पहली बार हुआ है।

बरगी बांध का इतिहास 35 साल पुराना है, लेकिन इससे पहले कभी भी जुलाई के पहले हफ्ते में पहली बार में इतने गेट नहीं खोले गए थे। यह घटना इस साल की रिकॉर्डतोड़ बारिश को दर्शाती है और मौसम के बदलते मिजाज की ओर भी इशारा करती है।

जल स्तर 417 मीटर के पार, अलर्ट जारी

शनिवार सुबह से लगातार हो रही बारिश और अपस्ट्रीम में भारी वर्षा के कारण बांध का जल स्तर 417 मीटर के ऊपर पहुंच गया। बरगी बांध की फुल टैंक लेवल करीब 422.76 मीटर मानी जाती है। जल स्तर के अचानक बढ़ने से प्रशासन ने अलर्ट जारी करते हुए नर्मदा नदी किनारे के इलाकों में सावधानी बरतने की सलाह दी है।

कार्यपालन यंत्री बरगी बांध राजेश सिंह गौंड के अनुसार खोले गये नौ गेट में से गेट नंबर दस, ग्यारह और बारह को दो-दो मीटर, गेट नंबर नौ और तेरह को डेढ़-डेढ़ मीटर, गेट नंबर आठ और चौदह को एक-एक मीटर तथा गेट नंबर सात और 15 को आधा-आधा मीटर की ऊंचाई तक खोला गया है। उन्होंने बताया कि बांध में आवक को देखते हुये कभी भी इससे पानी निकासी की मात्रा घटाई या बढ़ाई जा सकती है।

बरगी बांध का इतिहास

बरगी बांध का निर्माण 1974 में शुरू हुआ और 1990 में पूरा हुआ। घाटी विकास योजना का यह प्रमुख बहुउद्देशीय बांध है, जो सिंचाई, पेयजल, बिजली उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण जैसे उद्देश्यों की पूर्ति करता है।

बांध की ऊंचाई 69 मीटर और उपयोगी जलग्रहण क्षमता लगभग 3180 मिलियन क्यूबिक मीटर है। यह जबलपुर जिले में नर्मदा नदी पर स्थित है और राज्य के कई जिलों को पानी उपलब्ध कराता है।

जुलाई मध्य या आखिर तक भरता है

बरगी बांध का विशाल जलाशय सामान्यत: जुलाई मध्य या आखिर तक भरता है। जुलाई के पहले सप्ताह में गेट खोलना बहुत ही दुर्लभ घटना रही है। 1990 से लेकर अब तक के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो 1 से 7 जुलाई के बीच एक साथ नौ गेट कभी नहीं खोले गए।

श्री रोहित ने बताया कि जून के आखिरी और जुलाई के पहले सप्‍ताह में भारी बारिश के चलते यह निर्णय लिया गया है। इसके पहले के वर्षों में 18 से 20 जुलाई में ही ऐसी स्थिति निर्मित होती थी, लेकिन इस बार अत्‍याधिक बारिश के चलते बांध के नौ गेट जुलाई के पहले सप्‍ताह में ही खोलने पड़े।

विशेषज्ञों की चेतावनी और अलर्ट

मौसम विभाग ने बताया है कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आने वाली नमी के कारण जून अंत और जुलाई के पहले सप्ताह में बेहद सक्रिय मानसूनी सिस्टम बना। इससे मध्यप्रदेश के नर्मदा बेसिन में व्यापक और तेज बारिश हुई।

विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के ऐसे असामान्य पैटर्न भविष्य में और बढ़ सकते हैं। प्रशासन ने नर्मदा किनारे रहने वाले गांवों और शहर के हिस्सों में चेतावनी जारी की है और लोगों से नदी किनारे न जाने की अपील की है।

सर्तकता जरूरी

बरगी बांध का यह रिकॉर्ड- 35 वर्षों में पहली बार जुलाई के पहले ही सप्ताह में 9 गेट एकसाथ खोलना – मौसम के बदलते मिजाज और जलवायु के बढ़ते अनिश्चितपन की एक मिसाल है। यह प्रशासन और आम जनता दोनों के लिए चेतावनी है कि आने वाले वर्षों में और सतर्कता और तैयारियां जरूरी होंगी।

बाढ़ नियंत्रण कक्ष रानी अवंति बाई लोधी सागर परियोजना के प्रभारी आरआर रोहित ने बताया कि निचले क्षेत्र में अत्‍याधिक बारिश के चलते यह स्थिति निर्मित हुई है। बांध में पानी आने के कारण एवरेज 1.33 मीटर गेटों को खोला गया है।