गुरु पूर्णिमा 2025: दीक्षा के साथ हो समर्पण, तभी होती है आध्यात्मिक यात्रा पूर्ण- राघवदेवाचार्य जी

10 जुलाई को भगवती सदन, स्नेह नगर में गुरु पूर्णिमा महोत्‍सव मनाया जाएगा

हम 10 जुलाई को पूरे विश्व में गुरु पूजा का पावन पर्व मनाते हैं। इस दिन पूर्णिमा भी होती है और गुरु परंपरा में यह सबसे बड़ा अवसर होता है जब हम अपने गुरु के चरणों में जाकर पूजा करते हैं, आशीर्वाद लेते हैं और अपने जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति के लिए उनका मार्गदर्शन पाते हैं।

लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल गुरु दीक्षा लेना ही पर्याप्त नहीं है। आजकल समर्पण की भावना में कमी दिखाई देती है। दीक्षा के साथ सच्चा समर्पण भी होना चाहिए। हमें संख्या नहीं बढ़ानी है, बल्कि अच्छे और योग्य लोगों को सही ज्ञान देकर आगे बढ़ाना है। यही सच्ची गुरु सेवा और समाज सेवा है।

जबलपुर में आयोजित एक कथा के दौरान उपस्थित जगद्गुरु सुखानंद द्वाराचार्य स्वामी श्री राघव देवाचार्य जी महाराज।

यदि हम अपने प्राचीन ऋषि-मुनियों की परंपरा को देखें, तो वे अपने शिष्यों को वर्षों तक पढ़ाते-समझाते थे। फिर दीक्षा देते थे और उन्हें समाज के कल्याण के लिए भेजते थे। वे केवल मंत्र नहीं देते थे, बल्कि उन्हें चरित्रवान और जिम्मेदार नागरिक बनाते थे। यह दीक्षा के साथ दी जाने वाली शिक्षा और गुरु के प्रति समर्पण की मिसाल थी।

धार्मिक आयोजन में होती है भारी भीड़

आजकल बहुत जगह राम कथा, श्रीकृष्ण कथा, नर्मदा कथा, शिव पुराण जैसे आयोजनों में भारी भीड़ देखी जाती है। बड़े-बड़े कथावाचकों के सामने लोग हज़ारों की संख्या में जुटते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या हर श्रोता उस कथा का सार वास्तव में आत्मसात करता है? क्या वे घर जाकर जीवन में उसे उतारते हैं? बहुत से लोग तो कथा में सोते मिल जाएंगे। कुछ केवल यह सोचकर चले आते हैं कि चलो भीड़ में शामिल हो लें, एक कार्यक्रम देख लें।

अपने भक्‍तों और शिष्‍यों के साथ जगद्गुरु सुखानंद द्वाराचार्य स्वामी श्री राघव देवाचार्य जी महाराज।

अपनी बुद्धि को प्रबल बनाएं

मेरा कहना यह है कि शरीर के स्वार्थ को छोड़ें और अपनी बुद्धि को प्रबल बनाएं। कथा में अवश्य जाएं, और बड़ी संख्या में जाएं-  लेकिन वहां से कुछ ऐसा लेकर लौटें जो उनके जीवन को सवार दे। कथा केवल सुनने के लिए नहीं है – वह जीवन को सुंदर और अर्थपूर्ण बनाने का मार्ग है। जब हम यात्राओं और बाहरी चकाचौंध को छोड़कर कथा सुनने जाएं और वहां कहे गए वचनों का पालन करें, तभी वह कथा हमें पूर्ण रूप से प्राप्त होगी।

केवल बैठने या भीड़ जुटाने से कुछ नहीं होगा। गुरु दीक्षा लेने के बाद यदि शिष्य गुरु के प्रति समर्पित नहीं है और उनके मार्ग पर नहीं चलता तो वह दीक्षा भी व्यर्थ है। गुरु-शिष्य परंपरा का मर्म यही है – शिक्षा और समर्पण का संतुलन। यही सच्ची श्रद्धा है।

(जैसा कि जगद्गुरु सुखानंद द्वाराचार्य स्वामी श्री राघव देवाचार्य जी महाराज ने राष्‍ट्र दृष्टि न्‍यूज को चर्चा के दौरान बताया)

गुरु पूर्णिमा एवं दीक्षा महोत्सव का आयोजन

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्रीमद् जगद्गुरु सुखानंद द्वाराचार्य स्वामी राघव देवाचार्य जी के सान्निध्य में “श्री गुरु पूर्णिमा एवं दीक्षा महोत्सव” का आयोजन 10 जुलाई 2025 को होगा। यह कार्यक्रम प्रातः 10 बजे से 595, भगवती सदन, स्नेह नगर, मेन रोड, जबलपुर में आयोजित किया जाएगा। इसका आयोजन श्री राघव शिष्य मंडल और श्री राघव सेवा संस्था द्वारा किया जा रहा है।

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