दक्षिण पन्ना में गिद्ध संरक्षण की ऐतिहासिक सफलता, ग्रीष्मकालीन गणना में 836 गिद्ध दर्ज

पन्ना। दक्षिण पन्ना वनमण्डल में गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी सफलता सामने आई है। वर्ष 2026 में आयोजित 3 दिवसीय ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना में औसतन 836 गिद्ध दर्ज किए गए, जो बीते कई दशकों का सबसे बड़ा ग्रीष्मकालीन रिकॉर्ड माना जा रहा है। गणना के पहले दिन 869, दूसरे दिन 847 तथा तीसरे दिन 792 गिद्ध दर्ज किए गए।

पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि

पिछले वर्ष अप्रैल 2025 में गिद्धों की संख्या 575 दर्ज की गई थी। इस वर्ष की तुलना में यह वृद्धि वन विभाग द्वारा किए जा रहे संरक्षण, मॉनिटरिंग और जागरूकता प्रयासों का सकारात्मक परिणाम मानी जा रही है।

गर्मियों में सामान्यतः कम रहती है संख्या

विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों में आने वाली प्रवासी गिद्ध प्रजातियां गर्मी शुरू होते ही अपने मूल क्षेत्रों की ओर लौट जाती हैं। इसी कारण ग्रीष्मकालीन मौसम में गिद्धों की संख्या सामान्यतः कम रहती है। इसके बावजूद दक्षिण पन्ना में बड़ी संख्या में गिद्धों का दर्ज होना सुरक्षित आवास और प्रभावी संरक्षण का संकेत है।

कई प्रजातियों की मौजूदगी

गणना के दौरान देशी गिद्ध, सफेद गिद्ध, व्हाइट-रम्प्ड गिद्ध एवं रेड-हेडेड गिद्ध प्रमुख रूप से दर्ज किए गए। इनमें देशी और सफेद गिद्धों की संख्या सबसे अधिक रही, जो इस क्षेत्र की जैव विविधता के लिए सकारात्मक संकेत है।

‘वल्चर फ्रेंडली गौशाला’ अभियान का असर

वन विभाग द्वारा चलाए जा रहे “वल्चर फ्रेंडली गौशाला सर्टिफिकेशन” अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों, गौशालाओं और पशु चिकित्सालयों में जागरूकता अभियान चलाया गया। इसमें गिद्धों के लिए घातक दवाओं के स्थान पर सुरक्षित विकल्पों के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया, जिसका सकारात्मक प्रभाव अब सामने आ रहा है।

तकनीक का उपयोग, मॉनिटरिंग हुई मजबूत

इस वर्ष पहली बार गिद्ध गणना के दौरान मोबाइल ऐप के माध्यम से डेटा एंट्री की गई, जिससे वैज्ञानिक मॉनिटरिंग को और मजबूती मिली है और आंकड़ों की सटीकता भी बढ़ी है।

वनकर्मियों का महत्वपूर्ण योगदान

इस कार्य में रेंज ऑफिसर नीतेश पटेल एवं विवेक जैन सहित मैदानी वनकर्मियों ने कठिन वन क्षेत्रों में पैदल भ्रमण कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही गिद्ध विशेषज्ञ दिलशेर खान ने तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया।

पर्यावरण के ‘सफाईकर्मी’ हैं गिद्ध

विशेषज्ञों के अनुसार गिद्ध प्रकृति के महत्वपूर्ण “सफाईकर्मी” होते हैं, जो मृत पशुओं को साफ कर पर्यावरण को संक्रमण से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनकी बढ़ती संख्या पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है।

रिपोर्ट: राकेश कुमार शर्मा

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