
जबलपुर। यज्ञ में आहुतियां और वैदिक ऋचाओं से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, साथ ही हानिकारक गैसों और नकारात्मक ऊर्जा का दमन होता है। प्राचीन वैदिक मंत्रों से प्रज्ज्वलित अग्नि के दर्शन मात्र से भक्त के समस्त रोग, शोक और दोषों का नाश हो जाता है।
वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टि से यज्ञ का महत्व
यज्ञ वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों ही दृष्टि से जीव, जीवन और समाज के लिए लाभदायक है। वैदिक मंत्रों के प्रभाव से भूत, भविष्य और वर्तमान के कष्ट दूर होते हैं तथा वातावरण में मौजूद कीटाणुओं का नाश होता है।
दत्तयाग का तीसरा दिन धार्मिक वातावरण में प्रारंभ
पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में श्री दत्त भजन मंडळ द्वारा आयोजित पंच दिवसीय यज्ञ का तीसरा दिन अत्यंत धार्मिक वातावरण के बीच प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत देवतापीठ की पूजा, वेदों के मंत्रोच्चार और कलश पूजन के साथ की गई।
यज्ञ कुंड में दी गई आहुतियां
यज्ञाचार्य आर्वीकर गुरुजी के सान्निध्य में मुख्य यजमान सौ. माधुरी नाजवाले, सुनील नाजवाले सहित सहयजमान अमर परांजपे, नितीन परांजपे, मुरलीधर पाळंदे, अनिल राजूरकर, विलास ताम्हनकर, दिगंबर गोखले, सौ. जया चितळे, अरुण गायकी, डॉ. सुनील चिंचोळकर, सौ. शिल्पा ताम्हणे आदि ने यज्ञ कुंड में आहुतियां अर्पित कीं।
मंत्रोच्चार से भक्तिमय हुआ वातावरण
इस दौरान “श्रीअभयप्रदायानेन नमः”, “ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः”, “शची पुरंदरया नमः स्वाहा” जैसे मंत्रों के उच्चारण से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
दत्तात्रेय उपासना का महत्व
ज्ञात हो कि भगवान दत्तात्रेय अत्रि और अनसूया के पुत्र हैं तथा स्मर्तुगामी कहलाते हैं। पुरुषोत्तम मास में ब्रह्मा, विष्णु और महेश की संयुक्त उपासना यदि यज्ञ के माध्यम से की जाए तो यज्ञकर्ता को लौकिक एवं पारलौकिक उन्नति प्राप्त होती है।
श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह
प्रतिदिन दर्शन कर, यज्ञ में आहुति डालकर और यज्ञशाला की प्रदक्षिणा कर श्रद्धालु भावविभोर हो रहे हैं। यज्ञ में श्री दिलीप सप्रे, अभय जोशी, सुबोध गोसावी, सुधीर नाईक अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।