आयुर्वेद, सिद्धा, यूनानी मेडिकल कॉलेजों में छात्र द्वारा मांगे जाने पर मूल दस्तावेज वापस करना होगा

मूल दस्तावेज रजिस्ट्रार व प्रिंसिपल की कस्टडी में रहेंगे

भोपाल।

भारतीय चिकित्सा पद्दति राष्ट्रीय आयोग – एनसीआईएसएम आयुष मंत्रालय भारत सरकार के तहत आयुर्वेद बोर्ड के सदस्य डॉ अतुल बाबू वार्षणेय ने पत्र जारी कर भोपाल मप्र, जोधपुर राजस्थान, बरेली उत्तरप्रदेश, नईदिल्ली, रायपुर छत्तीसगढ़, पटना बिहार समेत देशभर के आयुर्वेद बीएएमएस, सिद्धा, सोवा-रिग्पा, यूनानी बीयूएमएस एएसयूएस मेडिकल कॉलेजों को स्पष्ट कर दिया है कि अब प्रवेशित छात्रों के मूल दस्तावेज बंधक जैसे नहीं रख सकेंगे। छात्र द्वारा मांगे जाने पर या पाठ्यक्रम पूरा होने पर या प्रवेश वापसी पर उचित पावती के साथ छात्र को मूल दस्तावेज वापस करना होगा।

दरअसल एनसीआईएसएम के संज्ञान में आया है कि प्रवेश के वक्त छात्रों द्वारा प्रस्तुत मूल दस्तावेजों का उचित रख-रखाव नहीं किया जाता रहा है। आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ राकेश पाण्डेय ने बताया कि मूल दस्तावेजों में मार्कशीट्स, टीसी, जाति व मूल निवासी प्रमाणपत्र, मायग्रेशन, नीट या एआईएपीजीईटी स्कोर कार्ड होते हैं। अब मूल दस्तावेजों में स्टैपलर पिन, मार्कर, किसी भी प्रकार की सील या निशान लगाना वर्जित कर दिया गया है। यह यूजी व पीजी दोनों संस्थानों में लागू होगा। सत्यापन के पश्चात मूल दस्तावेजों को संस्था अपने पास नहीं रखेगा। शैक्षणिक फाइल में केवल सत्यापित छायाप्रति ही रखी जा सकेगी।

मूल दस्तावेज अग्निरोधक, ताला लगाने योग्य केबिनेट में रजिस्ट्रार व प्रिंसिपल के तहत संग्रहित होना चाहिये। इन नियमों का कड़ाई से पालन के निर्देश हैं वर्ना लापरवाही होने पर उचित कार्यवाही एनसीआईएसएम करेगा। प्रदेश समेत देशभर के अधिकतर राज्यों में एएसयूएस मेडिकल कॉलेजों में सेंट्रल व स्टेट कोटे के तहत प्रवेश हेतु काउंसलिंग प्रारंभ हो गई है। देशभर के 700 से ज्यादा एएसयूएस मेडिकल कॉलेजों में दो लाख से ज्यादा यूजी-पीजी छात्र अध्ययनरत हैं।

छात्रों के मूल दस्तावेज रहेंगे सुरक्षित

एनसीआईएसएम नईदिल्ली के निर्णय से अब लापरवाही पर अंकुश लगने के साथ ही आयुष छात्रों के मूल दस्तावेज सुरक्षित रह सकेंगे।
— डॉ राकेश पाण्डेय
राष्ट्रीय प्रवक्ता — आयुष मेडिकल एसोसिएशन