आयुर्वेद को उपचार का पहला विकल्प बनाने के प्रयास तेज: डॉ राकेश पाण्डेय

भोपाल। केंद्रीय आयुष मंत्रालय भारत सरकार ने आयुर्वेद को उपचार का पहला विकल्प बनाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। यह कहना है सर्वपल्ली राधाकृष्णन कॉलेज ऑफ आयुर्वेद हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर भोपाल के प्रिंसिपल एवं आयुष मेडिकल एसोसिएशन व अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन की मध्यप्रदेश शाखा के डॉ राकेश पाण्डेय का।

नवीन नीति की आवश्यकता

डॉ पाण्डेय ने कहा कि आयुर्वेद के लिए नवीन नीति 2025 की आवश्यकता है। वैश्विक स्तर पर केंद्रीय आयुष मंत्रालय भारत सरकार के साथ-साथ नेशनल कमीशन फॉर इण्डियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन व नेशनल कमीशन फॉर होम्योपैथी भी बखूबी अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।

नेशनल आयुष मिशन, सीसीआरएएस एवं विभिन्न योजनाओं के तहत अनुसंधान व नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025–26 तक आयुर्वेद क्षेत्र में शिक्षण, प्रशिक्षण व निर्माण को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का आदान-प्रदान तथा आयुर्वेद–आयुष का वैश्विक स्तर पर प्रमाणिक रूप से स्थापित होना इस दिशा में एक बड़ा कदम है।

मध्यप्रदेश की भूमिका और प्रगति

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, आरोग्य भारती, नेशनल एडवाइजर आयुर्वेद भारत सरकार डॉ अशोक वार्षणेय और आयुष मंत्री मप्र इंदर सिंह परमार का प्रदेश के आयुर्वेद–आयुष क्षेत्र में योगदान सराहनीय है। मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, उत्तरप्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, उत्तराखण्ड समेत देशभर में आयुर्वेद–आयुष के 4000 से ज्यादा बड़े अस्पताल, 167 से अधिक इंटीग्रेटेड हॉस्पिटल्स, 12000 से ज्यादा वेलनेस सेंटर्स संचालित हो रहे हैं।

वर्तमान में 950 से अधिक आयुष मेडिकल कॉलेजेज हैं, और प्रतिवर्ष 30 से 40 नए कॉलेज खोले जा रहे हैं। लगभग हर जिले में नए आयुष वेलनेस सेंटर्स खोले जा रहे हैं। यूजी और पीजी की सीटों में बढ़ोतरी के साथ वर्तमान में पाँच लाख से अधिक आयुष डॉक्टर पंजीकृत हैं और वर्ष 2030 से हर साल 60 हजार से अधिक नए आयुष डॉक्टर तैयार होंगे। यह दर्शाता है कि चिकित्सा क्षेत्र में आयुर्वेद अग्रणी भूमिका निभाने जा रहा है।

आयुष क्षेत्र में उद्यमिता और नवाचार

आयुष उद्यमियों, किसानों, संस्थानों, प्रोफेशनल्स, चिकित्सकों, शिक्षकों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, शोधार्थियों और वैज्ञानिकों के लिए आयुष मंत्रालय द्वारा कई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव और केंद्रीय आयुष सचिव डॉ राजेश कोटेचा के नेतृत्व में यह प्रयास प्रभावी रूप से आगे बढ़ रहे हैं।

आयुर्वेद का भविष्य

डॉ राकेश पाण्डेय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हमेशा कहते हैं कि भारत हर्बल पौधों का खजाना है, यह हमारा ‘हरा सोना’ है। यह दर्शाता है कि देश में आयुर्वेद–आयुष के क्षेत्र में ठोस कार्य हो रहे हैं। वह समय दूर नहीं जब राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग बनेगा और सभी पैथियां एक ही छत के नीचे जनमानस को लाभ पहुंचाती दिखेंगी।

अगर शीघ्र ही आयुर्वेद को राष्ट्रीय चिकित्सा पैथी घोषित किया जाता है तो इससे बड़ा देशहित का कदम कोई और नहीं हो सकता। कोविड काल के बाद राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आयुर्वेद–आयुष की स्वीकार्यता बढ़ी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और विभिन्न आधुनिक चिकित्सा संस्थानों के साथ आयुष द्वारा किए जा रहे समझौते इस पैथी के प्रति जनता के भरोसे को और मजबूत बना रहे हैं।

समस्त राज्यों की सरकारों ने भी आयुर्वेद–आयुष के प्रति सकारात्मक कार्य किया है, जिससे यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में आयुर्वेद चिकित्सा की मुख्यधारा में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी संबंधित लेखक के अपने विचार हैं। इस लेख का उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी प्रदान करना है। पोर्टल इसकी किसी भी प्रकार की पुष्टि या ज़िम्मेदारी नहीं लेता।
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